अमर उजाला ब्यूरो
रामपुर बुशहर।
महात्मा गांधी चिकित्सा सेवा परिसर खनेरी अस्पताल में स्क्रब टायफस के अब तक करीब 200 मामले आ चुके हैं। बरसात के दौरान जुलाई से सितंबर तक ऐसे मामले सामने आते हैं। गंभीर हालत में मरीजों को आईजीएमसी शिमला रेफर किया जा चुका है। खनेरी अस्पताल की ओपीडी में रोज स्क्रब टायफस के करीब पांच मामले पहुंच रहे हैं। इस बार स्क्रब टायफस मामलों की संख्या बढ़ी है। जिला शिमला, मंडी, कुल्लू और किन्नौर से ऐसे मरीज आ रहे हैं। खनेरी अस्पताल के डॉक्टर गुमान नेगी ने बताया कि पिछले करीब डेढ़ माह से स्क्रब टायफस के मामले सामने आ रह हैं। इनमें से जो गंभीर मरीज हैं, उनको आईजीएमसी रेफर किया जा रहा है। खनेरी अस्पताल से करीब पांच मरीजों को आईजीएमसे रेफर किया गया है।
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स्क्रब टायफस के लक्षण
डॉ. गुमान नेगी ने बताया कि स्क्रब टायफस के मरीज को तेज बुखार आता है। मरीज का शरीर जकड़ा रहता है। मरीज के पेट में लगातार दर्द रहता है। उल्टी और दस्त आते हैं। ऐसे मरीज के शरीर में गिल्टियां बन जाती हैं।
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कैसे करें बचाव
स्क्रब टायफस से बचने का सबसे आसान तरीका है कि लोग बगीचों और खेतों में गम बूट पहनकर घास काटने जाएं। शरीर को पूरी तरह से ढककर रखें, ताकि स्क्रब टायफस का कीड़ा न काट सके। अगर किसी को स्क्रब टायफस है तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। स्वयं या मेडिकल स्टोर से ली दवाई को डॉक्टर को दिखाए बिना इस्तेमाल न करें। स्क्रब टायफस के मरीजों को डाक्सीसाइक्लिन दवा दी जाती है।
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