चावल नगरी के रूप में चर्चित टांडा संसाधनों के अभाव में जनपद मुख्यालय से पास होकर भी बहुत दूर है। सड़कें ठीक नहीं होने और बिजली पर्याप्त नहीं मिलने जैसी तमाम समस्याओं के चलते राइस मिलर्स भाग रहे हैं। मजदूर भी खाली होने पर दूसरे शहरों में नौकरी कर रहे हैं। 50 के आसपास राइस मिलों में अब 25 बची हैं। रुसवाई यूं ही चली तो चावल नगरी में चावल ढूंढते रह जाएंगे।
जिले के उपनगर टांडा के लोग जर्जर सड़कों तथा बिजली न मिलने की समस्या के कारण परेशान हैं।इससे टांडा के राइस मिलर्स का बड़े पैमाने पर होने वाला चावल का कारोबार भी बुरी तरह प्रभावित हो गया। जहां पहले करीब 50 राइस मिलों के जरिए बड़ी संख्या में मजदूर तबके के लोग रोजगार हासिल करते थे आज वही लोग भोपाल, दिल्ली, बैंगलोर, मुम्बई, मुरादाबाद, हल्द्वानी, काशीपुर, रामनगर आदि जगहों पर मजदूरी करने को मजबूर हैं।
बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है। अब करीब 25 राइस मिलें बची हैं। बिजली न मिलने के कारण यह भी बंद होने के कगार पर हैं। राइस मिल स्वामी भी दूसरे रोजगार की तलाश में हैं। स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो गई है कि कुछ मिल स्वामियों द्वारा अपने राइस मिल तोड़ कर उनके स्थान पर प्लॉटिंग कर दी गई है।