शाहबाद। जीवित बुजुर्ग किसान को मृत दर्शाकर उसकी तीन बीघा जमीन ऐसे तीन लोगों के नाम दर्ज कर दी गई है जो उसके गांव के रहने वाले भी नहीं है। अब वृद्ध किसान लाठी टेकता हुआ अपने जीवित होने का प्रमाण देने के लिए रोजाना तहसील के चक्कर काट रहा है। लेकिन एसडीएम, तहसीलदार सहित कोई भी उसकी बात सुनने को तैयार नहीं है।
तहसील क्षेत्र के ढकुरिया गांव निवासी सत्तर वर्षीय किसान रामभरोसे के नाम गांव में तीन बीघा जमीन है और उनके तीन बेटे हरपाल सिंह, किशनपाल सिंह व परम सिंह हैं। जिसमें छोटे बेटे परम सिंह की मौत हो चुकी है। जीवित रामभरोसे को तीन साल पूर्व मृत दर्शाकर उसकी तीन बीघा जमीन ऐसे तीन लोगों के नाम कर दी गई है जो ढकुरिया गांव के निवासी भी नहीं है। जीवित किसान को मृत दर्शा देने का खुलासा तब हुआ जब किसान रामभरोसे के बेटे हरपाल सिंह ने एक दिन तहसील जाकर अपने पिता जी के नाम की जमीन की खतौनी निकलवाई तो उसमें जीवित रामभरोसे को मृत दर्शाकर उनकी जमीन प्रेमपाल, भोले व सरवती के नाम दर्ज थी। जबकि इन तीनों नाम का कोई भी व्यक्ति ढकुरिया गांव में नहीं है। अपने जीवित पिता को खतौनी में मृतक देख हरपाल सिंह के होश उड़ गए। वह तत्काल अपने घर आया और जीवित पिता को लेकर शाहबाद तहसील पहुंचा। जहां उसने एसडीएम व तहसीलदार के समक्ष अपने जीवित पिता को पेश करते हुए जीवित को मृत दर्शाने वाले लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की। लेकिन शिकायत करने के बावजूद भी उपरोक्त दोनों अधिकारी जीवित किसान को न तो कागजों पर जीवित कर पा रहे है और न ही जीवित को मरा दर्शाकर उसकी जमीन दूसरों के नाम कर देने वाले लेखपाल के खिलाफ कोई कार्रवाई कर रहे हैं। जिससे जीवित किसान रामभरोसे परेशान है और बुढ़ापे में अपने जीवित होने का प्रमाण देने के लिए रोजाना लाठी टेकता हुआ तहसील में अधिकारियों के चक्कर काट रहा है। जबकि एसडीएम घनश्याम त्रिपाठी का कहना है कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं है। अगर ऐसा कोई मामला है तो वे इस मामले की जांच कराके दोषी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।