फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आतिशबाजी से हवा में घुला जहर, मौसम में बढ़ गई गर्मी

विज्ञापन
विज्ञापन
आतिशबाजी से हवा में घुला जहर, मौसम में बढ़ गई गर्मी
विज्ञापन

रामपुर। दिवाली पर जिले भर में जमकर आतिशबाजी छोड़ी गई। आतिशबाजी का धूम-धड़ाका आधी रात के बाद तक जारी रहा। इस आतिशबाजी ने हवा में घातक रसायनों का जहर घोल दिया। जिस कारण आतिशबाजी के बाद मौसम में भी बदलाव महसूस हुआ।
दिवाली की धूम आतिशबाजी के बिना अधूरी सी महसूस की जाती है लेकिन, यह आतिशबाजी सेहत के लिए काफी नुकसानदेह होती है। गुरुवार रात दिवाली पर जिले भर में करीब 25 करोड़ की आतिशबाजी फूंके जाने का अनुुमान जताया गया है। आतिशबाजी में लेड, जिंक, कॉपर के साथ ही कई घातक केमिकल का प्रयोग किया जाता है। आतिशबाजी के बाद पर्यावरण पर पड़े असर के कारण मौसम में भी बदलाव महसूस किया गया। गुरुवार रात से शुक्रवार रात तक मौसम में पिछले दिनों की तुलना मामूली गर्मी अधिक रही। अधिकतम तापमान में करीब तीन डिग्री सेल्सियस का अंतर रहा। जो कि आतिशबाजी से निकले धुएं और घातक रसायनों के कारण ही था। आतिशबाजी के कारण हुए प्रदूषण का असर लोगों की सेहत पर पड़ा। इससे सांस, दमा, एलर्जी के रोगियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को सुबह तक वातावरण में प्रदूषण के कण उड़ते दिखे।
विज्ञापन

---------------------
अतिशबाजी का धुआं घातक
रामपुर। हिंदू कालेज मुरादाबाद में वनस्पति विज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा अनामिका त्रिपाठी का कहना है कि आतिशबाजी का धुआं घातक होता है। यह सीधे फेफड़ों पर अटैक करता है। छोटे-छोटे कणों में होने के कारण यह सांस के साथ अंदर जाता है। इसलिए आतिशबाजी के धुआं से सावधान रहने की जरूरत है।
-------------------
आतिशबाजी से पांच गुना बढ़ा प्रदूषण
रामपुर। दीपावली पर आतिशबाजी के कारण प्रदूशण का स्तर करीब पांच गुना अधिक हो गया। नेशनल एयर मानीटरिंग प्रोग्राम (नैम्प) के द्वारा कराए जा रहे सर्वे के मुताबिक रामपुर की आवोहवा एक तो फैक्ट्री शहर के अंदर होने के कारण पहले से ही प्रदूषित है, लेकिन दीपावली पर आतिशबाजी ने इस प्रदूषण को पांच गुना बढ़ा दिया।
विज्ञापन

--------------------------
आतिशबाजी से बढ़े प्रदूषण पर एक नजर
रामपुर शहर में प्रदूषण का स्तर
दिनांक पीएम-10 एसपीएम
10 अक्तूबर 99 176
12 अक्तूबर 98 174
14 अक्तूबर 99 177
18 अक्तूबर 104 180
19 अक्तूबर 435 650
20 अक्तूबर 520 7्20
----------------------
(पार्टिकुलेट मैटर (पीएम-10) का नेशनल एबीएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड के मुताबिक मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यू होना चाहिए। जबकि सस्पेक्टिड पार्टिकुलेट मैटर (एसपीएम 140 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यू होना चाहिए इस तरह तीन से पांच गुना तक पीएम बढ़ा है जोकि खतरनाक स्थिति है।)
---------------------
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें