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नवम सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं ने जिमाए कन्या-बरुआ

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सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना के साथ श्रद्धालुओं ने जिमाए कन्या-वरुआ
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रामपुर/सैफनी/शाहबाद/मसवासी/दढ़ियाल/पटवाई/मिलक/ बिलासपुर/खजुरिया/केमरी/भोट/स्वार। जिले भर में शुक्रवार को नवरात्र के नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना कर व्रत खोले गए। इसके साथ ही श्रद्धालुओं ने हवन कर कन्या-वरुआ भी जिमाए। दोपहर और शाम को महिलाओं ने घर-मंदिर में माता के छंद गाए।
नवरात्र पर्व में शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां भगवती के नौंवे स्वरूप मां सिद्धदात्री की पूजा-अर्चना की। पंडित नवनीत शर्मा बताते हैं कि मां सिद्धिदात्री महालक्ष्मी जी का स्वरूप हैं। इनकी अराधना के साथ ही नवरात्र व्रत का पारायण होता है। मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना से आठ सिद्धियों की प्राप्ति होती है। शहर के प्राचीन माई का थान मंदिर, त्रिपुरेश्वरी शक्ति पीठ, सिविल लाइंस स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर, मनोकामना मंदिर, श्री हरिहर मंदिर, महालक्ष्मी मंदिर समेत अन्य मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुट गई। श्रद्धालुओं ने माता की कपूर से आरती कर पुष्प, फल, मिष्ठान, लौंग, मेवा, चुनरी, श्रृंगार सामग्री आदि अर्पित की। घरों पर भी श्रद्धालुओं ने पूजन के साथ ही नवरात्र व्रत कथा का पाठ किया। मां की आरती और दुर्गा चालीसा का पाठ कर हवन का आयोजन किया। हवन में घी, लौंग, कपूर, सुपारी, जायफल और हवन सामग्री की आहुति के साथ हलवा, पूड़ी, मिठाई, नारियल आदि की आहुति देकर माता को भोग लगाया। हवन के बाद कन्या-वरुआ को भोज कराकर नवरात्र व्रत का पारायण किया।
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मिलक में नवरात्र के आखिरी दिन मां दुर्गा के नौंवे स्वरूप सिद्घिदात्री की आराधना की गई। भक्तों ने कन्याओं को जिमाकर व्रत खोले। नगर एवं क्षेत्र में शुक्रवार को सिद्घिदात्री की आराधना की गई। मंदिरों एवं देव स्थानों पर भक्तों का तांता लगा रहा। सामूहिक यज्ञ हुए और देवी स्वरूप कन्याओं को जिमाकर उपवास खोला। इस दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों की खासी मौज रही।
बिलासपुर के मंदिराें में डैम कालोनी स्थित दुर्गा पंचायती भवानी मंदिर, काली माता मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर, पंजाबी कालोनी मंदिर, रामपुर रोड का शिव मंदिर, कायस्थान में मढ़ी का मंदिर, श्री सत्यनारायण मंदिर, शिवबाग मंडी का शिव मंदिर, मनोरम मंदिर, परेवा फार्म में मनोकामना मंदिर, चंदायन मंदिर, ग्राम डंडिया का दुर्गा मंदिर में भी पूजा अर्चना का सिलसिला चला और उपवास के साथ अपराह्न में कन्याओं को जिमाकर ब्रत खोले। शाम को महिलाओं ने मंदिरों व घरों में दुर्गा मैया के छंद गाए। उधर, केमरी, भोट व खजुरिया के मंदिरों में भी पूजा अर्चना संपन्न हो गई।
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स्वार में शारदीय नवरात्र के नौवे दिन मां भगवती के नौवे स्वरूप मां सिद्धि दात्री की पूजा अर्चना कर कन्याओं को जिमा उपवास खोले। वही देवी के थान पर बच्चों की झाकियां बनाई गई। इस दौरान नगर के मंदिरों में हवन पूजन के साथ ही माता को चुनरी चढ़ाई गई। इस दौरान भक्तों की भारी भीड़ रही। शारदीय नवरात्र के नौवे दिन शुक्रवार की प्रात: से ही मां भगवती के नौवे स्वरूप मां सिद्धि दात्री की पूजा अर्चना श्रद्धालुओं ने शुरू कर दी। पूजा अर्चना का सिलसिला दिन भर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने भगवती से अपनी मनोकामना पूरी करने ओर परिवार की रक्षा करने की मन्नते मांगी। नगर के प्राचीन शिव मंदिर, गीता मंदिर, सैनी मंदिर, देवियाें के थानों पर सुबह से ही घंटे घड़ियालों की आवाजे सुनाई देने लगी। श्रद्धालुओं ने मां भगवती का हवन कर कन्याओं को जिमा ओर दानदक्षिणा दे उपवास खोले। शारदीय नवरात्र के आखिरी दिन नगर के मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। ओर कन्याओं को जिमाने का सिलसिला जारी रहा। जबकि नगर के मौहल्ला चक स्वार स्थित देवियों के थान पर बच्चो की मां दुर्गा, गणेश, राम लक्षमण आदि देवी देवताओं की सुंदर सुंदर झाकियां बनाने के साथ ही भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। वहीं बड़ा शिव मंदिर में हवन पूजन किया गया। गीता मंदिर में महिलाओं ने माता का श्रंगार कर चुनरी चढ़ाई। इस अवसर पर शिव कुमारी, मधूबाला, सरला वर्मा, ज्योति नागर, अंजना गुप्ता, चंद्रवती, सरोज शर्मा, सरोज सैनी, सीमा गुप्ता, उषा वर्मा आदि मौजूद थी। वही मिलकखानम क्षेत्र के पीपली वन में स्थित बालसुंदरी माता के मंदिर पर नवरात्र के आखिरी दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर पर भंडारे का आयोजन किया गया।
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