विधानसभा क्षेत्र रोहड़ू से पहली बार भाजपा ने महिला उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा है। एक साल से भाजपा में टिकट के लिए जनता के बीच पैठ बना रहे कई दावेदारों के मंसूबों पर पानी फिर गया है। विधानसभा रोहड़ू की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के इतिहास में पहली बार महिला उम्मीदवार को किसी राजनीतिक दल ने विधानसभा चुनाव में उतरा है। यहां से केवल एक बार ही उप चुनाव 2009 में भाजपा से खुशी राम बालनाटाह चुनाव जीते है।
सीट आरक्षित होने के बाद वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के मोहन लाल ब्राक्टा ने भाजपा के बालक राम नेगी को रिकॉर्ड 28415 मतों से हराया था। कांग्रेस की ओर से इस बार भी चुनाव मैदान में मोहन लाल ब्राक्टा ही दावेदार है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद रोहड़ू में भाजपा विधानसभा के लिए कोई सशक्त उम्मीदवार तैयार नहीं कर पा रही थी। एक साल से राजेंद्र धीरटा ने पुलिस से अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेकर भाजपा के साथ मिल कर जनता के बीच लगातार संपर्क अभियान चलाए रखा। गांव के कई कार्यक्रमों में लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए दिन-रात एक किया। धीरटा को भाजपा से टिकट के आश्वासन भी मिलते रहे। आरएसएस से भी उनका नाता रहा है। भाजपा से ही जिला परिषद के सदस्य अरविंद धीमान भी टिकट के सशक्त दावेदार माने जाते थे। विनोद बुशहरी भी आखिर तक भाजपा के टिकट के लिए जोर अजमाईश करते रहे। लेकिन टिकट की दौड़ में लोगों के बीच अभी तक शशि बाला का नाम इनके साथ संभावितों में था। अब भाजपा ने शशि बाला को टिकट देकर रोहड़ू में नया दांव खेला है। पार्टी में शशि बाला जिला महासू महिला मोर्चा की अध्यक्ष है। रोहड़ू में कुछ माह पहले सक्रियता के बाद भाजपा की ओर से विधानसभा प्रत्याशी घोषित की गई है। ऐसे में अब पुरुष दावेदारों के बाहर होने के बाद पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी महिला उम्मीदवार के चुनाव मैदान में उतारे जाने से लगभग खत्म होने की संभावना है।