धमोरा (रामपुर)। नेपाल मजदूरी करने गए रामपुर के 16 लोग दो दिन तक भूखे रहने के बाद पैदल ही घर के लिए निकल पड़े। सभी लोग 19 अप्रैल को चले थे और 23 अप्रैल को यानी पांच दिन में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने 112 किलोमीटर का सफर तय किया। जिसमें 22 किलोमीटर का जंगल भी उन्हें पार करना पड़ा। रामपुर से पहले शहजादनगर पुलिस ने उन्हें हाईवे पर रोक लिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसके बाद सभी को जौहर विवि के अस्पताल में क्वारंटीन कर दिया गया।
कोरोना वायरस के खौफ के चलते देशभर में लॉकडाउन है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश भी इस महामारी से जूझ रहे हैं। ऐसे में दूसरे देशों में काम करने वाले मजदूर काम बंद होने के चलते भूख प्यास से परेशान होकर अपने-अपने गांवों को लौट रहे हैं। गुरुवार को शहजादनगर में पुलिस जीरो प्वाइंट पर चेकिंग कर रही थी। इस दौरान 16 लोगों को पुलिस ने हाईवे पर रोक लिया। पुलिस सभी को थाने ले आई। इसमें सात पुरुष और नौ महिलाएं शामिल थीं। शहजादनगर प्रभारी सतेंद्र कुमार ने बताया कि ये लोग मिलखानाम, भोट और अजीमनगर के रहने वाले हैं। सभी नेपाल के वर्दिया जिले के जमनीपुर गांव स्थित एक ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते थे। मजदूरों ने बताया कि पैसा समाप्त हो गया था, खाने को भी कुछ नहीं बचा था। इसके बाद राशन की व्यवस्था के लिए स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई थी। मगर दो दिन तक राशन न मिला। भूख से परेशान होकर 19 अप्रैल को 22 किलोमीटर जंगल के रास्ते चले। नेपाल से पीलीभीत, बरेली होते हुए शहजादनगर तक पहुंचे हैं। अब रामपुर तक जाना है। बीच-बीच में कुछ वाहनों से लिफ्ट भी मांगी, जिन्होंने कुछ दूरी तक छोड़ दिया। इस दौरान मजदूरों ने 112 किलोमीटर से ज्यादा का रास्ता तय किया है। मजदूरों से पूछताछ के बाद शहजादनगर पुलिस ने सभी के खाने-पीने की व्यवस्था की। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग को इसकी सूचना दी, एंबुलेंस से सभी को जौहर विवि के अस्पताल में क्वारंटीन करने के लिए भेज दिया गया।