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जल की बर्बादी, जीवन के लिए घातक

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रामपुर। जल की बर्बादी और मानसून में आ रही गिरावट से भूगर्भ जलस्तर निरंतर खिसकता जा रहा है। जिले के चार ब्लॉक डार्क जोन में जा चुके हैं। इन ब्लॉकों में सौ प्रतिशत से भी अधिक भूजल दोहन हो रहा है। चमरौआ ब्लॉक में सर्वाधिक 138.20 प्रतिशत तक पानी जमीन से निकाला जा रहा है।ऐसे में यदि भविष्य में भी जल संरक्षण के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई गई और इसी तरह से जल की बर्बादी जारी रही तो यह जीवन के लिए घातक सिद्ध होगी।
जीवन के लिए पानी आवश्यक है। लेकिन, पानी के उपयोग को लेकर हम लोग खुद ही सजग नहीं है। कभी वाहन धोने के लिए नल खोल दिया तो फिर बंद ही नहीं किया। घर में टंकी भरने के बाद पानी बहता रहता है। कई बार तो घरों में टंकियां खुली छोड़ दी जाती हैं, जो काम कम पानी में किया जा सकता है, उसके लिए हजारों लीटर पानी बहा दिया जाता है। इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों से खिलवाड़ किया जा रहा है। अंधाधुंध तरीके से पेड़ों को काटा जा रहा है तो तालाब और पोखरों पर भी अवैध कब्जे हो रहे हैं। जिले में कई तालाब तो सिर्फ कागजों में ही रह गए हैं। किसान भी ऐसी फसलों को ही तवज्जो दे रहे हैं, जिनके लिए पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। मसलन, साठा धान, मैंथा जैसी फसलों को बढ़ावा मिल रहा है।
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इसका सीधा असर खिसकते भूगर्भ के रूप में दिखाई दे रहा है। रामपुर के चार ब्लॉक शाहबाद, चमरौआ, सैदनगर और स्वार डार्क जोन में जा चुके हैं। चमरौआ विकासखंड में तो भूजल दोहन की स्थिति भयावह हो गई है। वाटर रिचार्जिंग के मुकाबले लोग 138.20 प्रतिशत तक जमीन से पानी निकाल रहे हैं, जबकि भूजन दोहन के मामले में सैदनगर ब्लॉक दूसरे स्थान पर है। यहां 120.63 प्रतिशत तक पानी इस्तेमाल किया जा रहा है। स्वार और शाहबाद विकासखंडों में भी पानी का उपभोग रिचार्जिंग के मुकाबले सौ फीसदी अधिक हो रहा है। मिलक और बिलासपुर की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है।
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