रामपुर। वैसे तो समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां ने गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर एक लाख से भी अधिक वोटों से जीत हासिल कर ली और पहली बार सांसद बन गए। उनकी जीत की खुशी में बसपा भी भागीदार है, लेकिन बसपा नेताओं के कई बूथ पर चुनाव के दौरान आजम को बढ़त नहीं मिल पाई थी।
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां इस बार खुद चुनाव मैदान में उतरे। सपा, बसपा गठबंधन प्रत्याशी के तौर पर उनके नाम का ऐलान होते ही भाजपा की ओर से उनकी धुर विरोधी अभिनेत्री जयाप्रदा नाहटा को चुनाव मैदान में उतारा। ऐसे में रामपुर संसदीय सीट पर आजम खां की चुनौती बड़ी थी। इसका एक कारण यह भी था कि इस सीट पर जयाप्रदा दो बार समाजवादी पार्टी से ही रामपुर की सांसद रही हैं, लेकिन इस बार दोनों आमने सामने थे। लिहाजा, मुकाबला कड़ा था। लेकिन, इसके बाद भी बहुजन समाज पार्टी के नेताओं ने इस चुनाव को गंभीरता से नहीं लिया। मिलक विधासभा क्षेत्र के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह सागर के गांव की बात की जाए तो यहां आजम खां काफी पीछे रहे। उनका गांव चमरौआ विधानसभा क्षेत्र में ग्राम करीमपुर शर्की है। यहां एक बूथ है। 318 नंबर इस बूथ पर आजम खां को महज 233 वोट ही प्राप्त हुए हैं, जबकि जयाप्रदा को 462 वोट मिले हैं। इस तरह आजम खां यहां से 229 वोटों से हार गए। कुछ यही हाल बसपा के लोकसभा प्रभारी रंजीत सागर के गांव का है। बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रूपपुर की बात की जाए तो यहां दो बूथ हैं। 295 और 296 नंबर बूथ। लेकिन, दोनों बूथों पर आजम खां को बेहद कम वोट मिले। जयाप्रदा को यहां दोनों बूथों पर 838 वोट मिले, जबकि आजम खां को महज 228 वोट ही मिल सके। इसके अलावा भी बसपा के कई ऐसा नेता हैं जिनके बूथ पर गठबंधन प्रत्याशी को बढ़त नहीं मिल पाई है। गठबंधन के प्रत्याशी चुनाव जीत गए हैं, लिहाजा इस बात की बहुत अधिक समीक्षा भी नहीं हो रही है।