स्वार। कोसी नदी में डूबे 13 वर्षीय छात्र को गंभीर हालत में सीएचसी स्वार लाया गया, जहां इमरजेंसी में डॉक्टर न मिलने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने हंगामा किया। बाद में उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।
नगर के मोहल्ला चक निवासी मिर्च कारोबारी सिराज अहमद अंसारी का 13 वर्षीय पुत्र शाहवेज शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे निकटवर्ती फाजलपुर गांव स्थित कोसी नदी पर साथियों के साथ नहाने गया था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। साथ गए बच्चों के शोर मचाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद उसे नदी से बाहर निकाला।
लोग शाहवेज को तत्काल सीएचसी स्वार लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उस समय इमरजेंसी में डॉक्टर मौजूद नहीं थे, जिससे नाराज होकर उन्होंने हंगामा किया। इसके बाद शाहवेज को रामपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन कुछ देर बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
शाहवेज एक निजी स्कूल में कक्षा आठ का छात्र था। वह परिवार के चार बच्चों में दूसरे नंबर का और दो बेटों में सबसे बड़ा था। उसकी असमय मौत से परिवार में कोहराम मच गया। शव घर पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और मां कई बार बेसुध हो गईं। मोहल्ले में भी शोक की लहर दौड़ गई तथा बड़ी संख्या में लोग परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे।
पूर्व सभासद इस्लाम अंसारी, शाहिद अंसारी और इरशाद हुसैन ने सीएचसी की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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परिजनों का आरोप, सीएचसी में डॉक्टर मौजूद होते तो बच जाती जान
स्वार। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। इससे समय पर उपचार नहीं मिल सका और उन्हें बच्चे को निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। उनका कहना है कि यदि सीएचसी में तत्काल डॉक्टर उपलब्ध होते और समय रहते उपचार शुरू हो जाता तो शाहवेज की जान बचाई जा सकती थी। डॉक्टर न मिलने से नाराज परिजनों ने अस्पताल में हंगामा भी किया, लेकिन बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे एसबीआर अस्पताल ले गए, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। संवाद
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बच्चे को जब सीएचसी लाया गया था तब इमरजेंसी में डॉक्टर जिया उर्ररहमान मौजूद थे। बच्चे की जांच की गई थी। वह ब्रेन डेड हो चुका था। परिजन संतुष्टि के लिए बच्चे को निजी अस्पताल ले गए थे, जहां भी डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। -डॉ. सतीश कुमार, सीएचसी अधीक्षक, स्वार