रामपुर। मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के पास बने बिजलीघर से करीब दस लाख रुपये के उपकरण चोरी होने का मामला लोकसभा चुनाव में दब गया। न तो पुलिस किसी नतीजे पर पहुंच सकी और न ही विभागीय जांच हो सकी।
अधीक्षण अभियंता ने भले ही जांच के लिए टीम का गठन कर दिया हो, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी टीम ने अपनी जांच पूरी नहीं की है। इस बावत विभाग को कोई रिपोर्ट भी नहीं सौंपी गई है। अब अधीक्षण अभियंता ने रिमाइंडर जारी किया है।
समाजवादी पार्टी की सरकार में लालपुर पर बिजलीघर को मंजूरी मिली थी। पांच एमवीए के इस बिजलीघर का निर्माण होने के बाद यह बिजलीघर चालू हो गया था, लेकिन इस पर कोई भी कनेक्शन नहीं था। बावजूद इसके बिजली का उपभोग हुआ। सूबे में भाजपा की सरकार आने के बाद बिजलीघर की सप्लाई बंद कर दी गई। इस मामले को लेेकर एसआईटी की ओर से जांच भी की जा रही है। वहीं, मार्च माह में बिजलीघर की दीवार तोड़ दी गई थी, क्योंकि इसका रास्ता यूनिवर्सिटी के भीतर से था। लेकिन, इससे छह दिन पूर्व ही बिजलीघर पर चोरों ने हाथ साफ कर दिया। यहां लगे पांच एमवीए ट्रांसफार्मर से करीब नौ ड्रम तेल चोरी हो गया। बसवार, पट्टे, तार समेत तमाम उपकरण चोरी हो गए। यहां स्टाफ की भी तैनाती थी, लेकिन फिर भी चोरी हो गई। वह भी तब जब इसका कोई रास्ता नहीं था। मामला सामने आने के बाद क्षेत्रीय उपखंड अधिकारी एवं अवर अभियंता पहले तो मामले को दबाने में लगे रहे, लेकिन उच्चाधिकारियों की जानकारी के बाद हड़कंप मच गया। करीब छह दिन बाद अजीमनगर थाने में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
मामले में विभागीय जांच के भी आदेश हुए थे। इसके लिए अधीक्षण अभियंता विजयपाल सिंह ने जांच टीम का गठन कर दिया था, जिसमें सहायक अभियंता मीटर विशाल मलिक, अवर अभियंता कमरूज्जमा आसिफ को शामिल किया गया था। टीम को पंद्रह दिनों में जांच पूरी करनी थी, लेकिन अब इस मामले की जांच नहीं हो सकी है। पुलिस भी चोरों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है। अब अधीक्षण अभियंता ने फिर से जांच के लिए टीम को रिमाइंडर जारी किया है।