रामपुर बुशहर।
किन्नौरी भाषा को जानना अब आसान हो जाएगा। कोई लिखित लिपि न होने के कारण इस भाषा का ज्ञान प्राप्त करना अभी तक मुश्किल था। लेकिन किन्नौर जिले के रोपा से ताल्लुक रखने वाले हरविंद्र नेगी ने किन्नौरी भाषा विज्ञान में शोध कर इसे समझना आसान बना दिया है। हरविंद्र ने दिल्ली विश्वविद्यालय से किन्नौरी भाषा विज्ञान में शोध पूरा किया है।
अब नेगी की इस विषय पर शोध की गई पुस्तक विभिन्न पुस्तकालयों में रखी जाएगी, ताकि कोई भी व्यक्ति किन्नौरी भाषा को समझ सके और इसके उत्थान के लिए कार्य कर सके। हरविंद्र नेगी ने कहा कि विदेशी शोधकर्ता की ओर से यहां की संस्कृति व रहन सहन पर शोध किया गया है। लेकिन यहां की भाषा पर अभी तक किसी ने शोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किन्नौरी भाषा को विदेशों तक पहुंचाना है। आधुनिक समय में किन्नौरी भाषा केवल जिले तक ही सीमित रह गई है। यहां तक कि यहां के लोग जो बाहर नौकरी करते हैं या पढ़ रहे वे भी अपनी इस भाषा से परहेज करने लगे हैं। ऐसे में कहीं न कहीं यह भाषा विलुप्त होने के कगार पर है। लेकिन हरविंद्र नेगी ने इस भाषा को पूरे प्रदेश व देश में पहचान दिलाने की कोशिश की है। अन्य शोधार्थियों को किन्नौरी भाषा में शोध करना आसान हो जाएगा। नेगी ने इससे पहले केलीफोरनिया यूनिवर्सिटी से भाषा विज्ञान में उपाधि हासिल की है। इसके बाद जब वह भारत आए तो उन्होंने अपनी पैतृक भाषा पर ही शोध करने की ठानी। लेकिन किन्नौरी भाषा की अभी तक कोई लिखित लिपि नहीं है ऐसे में इस भाषा में शोध करना काफी मुश्किल था। किन्नौरी भाषा में उपयोग होने वाले शब्द कहां से शुरू हुए, किस शब्द का भाषा के आधार पर सही मतलब है, ये सभी प्रश्न उनके सामने थे।