रामपुर/बिलासपुर/खजुरिया/केमरी/भोट। नवरात्र के पांचवे दिन देवी मां के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा-अर्चना हुई। परिणय परंपरा प्रारंभ करने वाली नारी शक्ति की प्रतीक मां स्कंदमाता से भक्तों ने मंगल कामना की। मंदिरों में भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। साथ ही कन्याओं की सेवा कर भोग लगाया।
चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन बुधवार को देवी मां के स्कंदमाता स्वरूप का पूजन किया गया। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। शंख, घंटे-घडिय़ाल की ध्वनि के बीच मां के मां के जयकारे लगाते हुए भक्तों ने मां की पूजा की। भक्तों ने नारियल, पुष्प, कपूर, फल, लौंग, मखाने आदि से माता की विधिवत पूजा कर सर्वमंगल की कामना की। पंडित नवनीत कुमार शर्मा ने बताया कि देवी स्कंदमाता कार्तिकेय और गणेश जी की मां हैं। स्कंदकुमार की माता होने के कारण ही मां पार्वती का नाम स्कंदमाता पड़ा। मां का यह स्वरूप शक्ति का द्योतक है। मां स्कंदमाता ने ही परिणय परंपरा शुरू की थी। मंदिरों में सुबह और शाम को भक्तों ने भजन-कीर्तन कर मां की महिमा का गुणगान किया। शहर के महालक्ष्मी मंदिर, दत्ताराम शिवालय मंदिर, श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर, मनोकामना मंदिर, माई का थान मंदिर समेत समस्त मंदिरों में पूरे दिन भक्तों की चहल-पहल रही। देवी भक्तों ने मंदिरों व घर पर ही दुर्गा सप्तसती, दुर्गा चालीसा का पाठ किया।
बिलासपुर क्षेत्र में चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन भक्तों ने मां भगवती के पांचवें स्वरुप माता स्कंदमाता देवी की पूजा अर्चना की। सुबह से ही श्रद्धालुओं में पूजा अर्चना को लेकर खासा उत्साह था। घरों व मंदिरों में श्रद्वालुओं ने पूजा अर्चना कर उपवास रखे। नगर के मोहल्ला कायस्थान के मढ़ी मंदिर, काली माता मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर, पंजाबी कालोनी मंदिर, दुर्गा पंचायती भवानी मंदिर, शिव मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, परेवा फार्म मंदिर, मनोरम मंदिर, चंदायन मंदिर, डंडिया मंदिर आदि मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। शाम को महिलाओं ने मंदिरों में छंद गाए और रात्रि में फलाहार कर व्रत को विश्राम दिया गया।