रायबरेली। निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का कार्य करा रही रामा कंस्ट्रक्शन कंपनी के अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। एसडीएम की जांच में कंपनी के जीएम की लापरवाही उजागर हुई है।
जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने कहा है कि तेज बुखार होने के बाद भी श्रमिक की कोविड-19 जांच नहीं कराई गई। यदि समय से जांच करा दी जाती तो शायद श्रमिक की जान बच सकती थी।
श्रमिक की मौत के बाद कोविड-19 जांच कराई गई तो वह पॉजिटिव पाया गया। परिवारीजनों की मौजूदगी में डलमऊ गंगाघाट पर शव का अंतिम संस्कार किया गया। गौरतलब है कि निर्माणाधीन एम्स में काम कर रहे दिल्ली के ई-3-78 चाणक्य प्लेस डीके मोहन गार्डेन निवासी किशोर झा (60) की शनिवार को संदिग्ध हालात में मौत हो गई।
आनन-फानन कंपनी के अधिकारियों ने शव दिल्ली भेज दिया था। डीएम के निर्देश पर शव वापस यहां लाया गया था। यहां उसकी कोरोना की जांच कराई गई। जांच में वो पॉजिटिव निकला। एसडीएम सदर शालिनी प्रभाकर का कहना है कि जांच में कंपनी के जीएम की लापरवाही सामने आई है।
एक सप्ताह से श्रमिक को 103 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा का बुखार था। बावजूद प्राइवेट में तो इलाज कराया गया, लेकिन कोरोना की जांच नहीं कराई गई। यह हाल तब था, जब प्राइवेट चिकित्सक कोरोना की जांच कराने पर ही इलाज कराने की बात कह रहा था।
यदि कोरोना की जांच पहले हो जाती तो शायद श्रमिक की जान बच सकती थी। कंपनी के अधिकारियों की लापरवाही की रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। अब डीएम स्तर से मामले में कार्रवाई की जाएगी।
मृतक के शव का डलमऊ में परिवारीजनों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कराया गया। उधर, कंपनी के जीएम राजीव कुमार बग्गा का कहना कि कोरोना की जांच कराई गई थी, लेकिन रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इलाज में लापरवाही नहीं बरती गई।