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अपने पैरों पर खड़ी होंगी महिलाएं, गांवों में लगेंगी उद्योग यूनिट

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रायबरेली। राष्ट्रीय आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की तैयारी है। पहले चरण में जिले के 45 महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए गांवों में उद्योग यूनिटें स्थापित की जाएंगी।
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अचार, कला क्राफ्ट, आटा चक्की, मिठाई डिब्बे आदि बनाने के उद्योग स्थापित कराए जाएंगे। समूह की महिलाएं काम करके उत्पाद तैयार करेंगी। इसी महीने से जिले में काम शुरू हो सकता है।
एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक (आजीविका) तीरथराज ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक स्वावलंबन के लिए मैन्युफैक्चरिंग यूनिटें एनआरएलएम के माध्यम से स्थापित कराई जाएंगी।
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पहले चरण में राही, लालगंज, बछरावां, हरचंदपुर आदि ब्लॉकों के 45 स्वयं सहायता समूहों को अलग-अलग यूनिटें स्थापित कराकर आर्थिक रूप से मजबूत करने का काम किया जाएगा।
यूनिटों की स्थापना के लिए काम शुरू करवा दिया गया है। एनआरएलएम से समूहों को आर्थिक मदद दी जाएगी, जिससे वह बेहतर ढंग से उद्योग को स्थापित करेंगी।
हाई लेवल मार्केट में बिकने के लिए जाएंगे प्रोडक्ट
स्वयं सहायता समूहों की औद्योगिक इकाइयों में तैयार प्रोडक्ट को हाई लेवल मार्केट में भेजवाकर बिकवाया जाएगा। जिला मिशन प्रबंधक (नॉन फार्म आजीविका) दिनेश कुमार का कहना है कि स्थापित होने वाली इकाइयों में जो भी माल तैयार होगा, उसे विभाग की ओर से अच्छे मूल्यों पर हाई लेवल मार्केट में बिकवाया जाएगा, जिससे समूहों को अधिक लाभ हो सके। योजना का पूरा लाभ स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को ही दिलाया जाएगा।
एनआरएलएम के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित कराया जा रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण के साथ ही सामुदायिक शौचालयों की जिम्मेदारी भी समूहों को दी गई है। अब उद्योगों के माध्यम से समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी है।
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शैलेश तिवारी, जिला मिशन प्रबंधक, एनआरएलएम
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