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Raebareli News: गांव आए तीनों शव तो बिलख पड़े परिजन

Sat, 25 Apr 2026 01:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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सरेनी के रानीखेड़ा गांव में मृतक हरिशंकर व हरिओम के रोते बिलखते परिजन। संवाद
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सरेनी। रानीखेड़ा गांव में बृहस्पतिवार को निसगर घाट पर गंगा स्नान करने के दौरान दो युवक और एक किशोर की डूबकर मौत हो गई थी। एक युवक जिला अस्पताल में भर्ती है। बीती रात दो भाइयों और किशोर का शव गांव आया तो परिवार के लोग बिलख पड़े। पूरे गांव में मातम पसर गया। शुक्रवार को एक साथ तीनों शव गांव से श्मशान घाट के लिए निकले तो हर किसी की आंऐं नम हो गईं।
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सरेनी क्षेत्र के रानीखेड़ा गांव निवासी सत्येंद्र कुमार राजपूत (25), हरिओम (20), हरिशंकर राजपूत (15) व हिमांशु (20) बृहस्पतिवार सुबह 10 बजे गंगा स्नान के लिए निसगर घाट के लिए घर से निकले थे। दोपहर करीब 11:45 बजे चारों गंगाघाट पर स्नान कर रहे थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हरिशंकर गहरे पानी में जाकर नहाने लगे। कुछ ही देर में वह डूबने लगे। उन्हें बचाने के लिए सत्येंद्र, हरिओम और हिमांशु भी गहरे पानी में उतर गए। एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में चारों नदी में डूब गए।
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लोगों के शोर मचाने पर आसपास मौजूद तैराक और गोताखोर तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद सभी को नदी से बाहर निकाला। गोताखोरों ने तीनों युवकों व किशोर को पुलिस की सहायता से सीएचसी पहुंचाया। हालत गंभीर होने पर सभी को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

जिला अस्पताल में हरिशंकर, उनके बड़े भाई हरिओम के अलावा परिवार के सत्येंद्र को मृत घोषित कर दिया गया। हिमांशू राजपूत का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।

बृहस्पतिवार रात करीब ग्यारह बजे जब तीनों शव गांव पहुंचे, तो महिलाएं और बच्चे दहाड़ मारकर रोने लगे। यह मंजर को देख हर किसी की आंखें नम हो गईं। शुक्रवार को गेगासों श्मशान घाट पर तीनों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

हरिओम और हरिशंकर की चिता को उनके चाचा बालकिशन ने मुखाग्नि दी। सत्येंद्र की चिता को उनके बड़े भाई शैलेंद्र कुमार ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर पूर्व विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।

बाबू शंकर बोले- उनकी तो बुढ़ापे की लाठियां ही टूट गईं
हरिओम और हरिशंकर के पिता बाबू शंकर ने बिलखते हुए कहा कि बुढ़ापे की दोनों लाठियां टूट गईं। उन्हें उम्मीद थी कि बच्चे पढ़-लिखकर नौकरी करेंगे। इससे उनका हाथ ट्रक की स्टेयरिंग से हट जाएगा, लेकिन विधाता को उनकी खुशियां मंजूर नहीं थीं। सत्येंद्र के बड़े भाई शैलेंद्र ने कहा कि बृहस्पतिवार का दिन उन्हें जीवन भर याद रहेगा।
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