सतांव। पूरे उम्मेद मजरे देदौर गांव निवासी संविदा कर्मचारी विवेक सिंह (44) ने मंगलवार रात खुदकुशी कर ली। बताते हैं कि स्थायी नौकरी का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। चार दिन पहले फैसला पक्ष में आने से विवेक तनाव में थे।
विवेक की मौत से परिजनों के आंसू नहीं थम रहे हैं। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की। विवेक सिंह अपनी पत्नी नमिता और नौ साल की बेटी के साथ लखनऊ में किराये का कमरा लेकर रहते थे। वह लखनऊ में कृषि विभाग में संविदा पर तैनात थे।
परिवार के लोगों के अनुसार दो दिन पहले अकेले विवेक गांव आए थे। रात में भोजन करने के बाद घर के दूसरी मंजिल पर बने कमरे में जाकर सो गए थे। बुधवार सुबह विवेक नीचे उतरकर नहीं आए तो पिता पूर्णमासी ने बेटे को आवाज दी। बेटे को न बोलने पर पिता जब कमरे के अंदर गए तो देखा कि छत के कुंडे से मफलर के सहारे विवेक का शव लटक रहा है। यह देख वह दंग रह गए। जानकारी पर परिजन और आसपास के तमाम लोग मौके पर आ गए।
मृत विवेक के बड़े भाई अभिषेक कुमार उन्नाव जिले के भगवंत नगर में कॉलेज में प्रवक्ता हैं, जबकि छोटे भाई अभिनय बहराइच में शिक्षक हैं। विवेक की मौत से पिता, भाइयों और पत्नी में रोना पीटना मचा है। गुरुबख्शगंज थाना प्रभारी संजय कुमार सिंह का कहना है कि किसी बात को लेकर विवेक परेशान थे। इसी वजह से उनके आत्महत्या किए जाने की बात सामने आ रही है। घटना की पड़ताल कराई जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में हुई थी अपील
ग्राम प्रधान ज्ञान प्रकाश बताते हैं कि नौकरी मिलने के बाद से ही विवेक परिवार समेत लखनऊ में रहते थे। 2016 में उनकी नियुक्ति हुई थी। इस दौरान प्रदेश भर के विवेक के साथ अन्य संविदा कर्मियों ने हाईकोर्ट में स्थायी नौकरी के लिए अपील की थी। प्रधान के अनुसार इस दौरान हाईकोर्ट ने इंटरव्यू कराकर स्थायी नौकरी दिए जाने का आदेश दिया था। इस पर संविदाकर्मी तैयार नहीं हुए थे। विवेक भी इस पर राजी नहीं थे और जब संविदाकर्मी सुप्रीम कोर्ट गए तो विवेक भी शामिल हो गए। सुप्रीम कोर्ट में अपील खारिज कर दी गई।