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Raebareli News: सफल सर्जरी से जेली-बेली कैंसर पीड़ित को मिला नया जीवन

Thu, 19 Mar 2026 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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रायबरेली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने जानलेवा जेली-बेली कैंसर से पीड़ित मरीज को नया जीवन दिया है। चिकित्सकों की टीम ने अत्याधुनिक एचआईपीईसी (हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) तकनीक के प्रयोग से इस जटिल सर्जरी को सफलता से अंजाम दिया। ऑपरेशन के 13 दिन बाद अब मरीज की हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। एम्स की निदेशक डॉ. अमिता जैन और अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव ने कैंसर से छुटकारा दिलवाने की सफल सर्जरी करने वाली टीम को बधाई दी है।
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कुछ दिन पहले सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की ओपीडी में पेट की तकलीफ से पीड़ित एक मरीज आया था। जांच कराने पर मरीज के जानलेवा कैंसर जेली-बेली से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। दुर्लभ श्रेणी की इस खतरनाक बीमारी में मरीज के पेट में बलगम जैसा पदार्थ भर गया था। चिकित्सकीय भाषा में इसे स्यूडोमिक्सोमा पेरिटोनाई (जेली-बेली) कैंसर कहा जाता है। मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए मुख्य सर्जन डॉ. अविनाश चंद्र सिंह की अगुवाई में टीम ने मरीज की तुरंत सर्जरी करने का निर्णय लिया। टीम में शामिल डॉ. अक्षय, डॉ. अनुष्का, डॉ. अभय राज यादव, डॉ. प्रवीण आदि ने अत्याधुनिक एचआईपीईसी (हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) तकनीक का उपयोग करके मरीज के पेट में फैले कैंसर की सफल सर्जरी की।
पेट के अंदर 41 से 43 डिग्री सेल्सियस पर दी कीमोथेरेपी
चिकित्सक डॉ. अविनाश चंद्र सिंह ने बताया कि इस तकनीक से ऑपरेशन के दौरान पेट के अंदर 41 से 43 डिग्री सेल्सियस पर कीमोथेरेपी देने के साथ ही माइटोमाइसिन-सी नामक दवा का प्रयोग किया गया। एचआईपीईसी एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है। इसमें कैंसर कोशिकाओं को सीधे लक्षित किया जाता है। यह तकनीक पेट के अंदर उच्च तापमान पर कीमोथेरेपी दवा पहुंचाती है। इससे दवा की प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
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ऑपरेशन के बाद संक्रमण का जोखिम कई गुना
चिकित्सकों ने बताया कि इलाज की यह तकनीक जेली-बेली जैसे दुर्लभ कैंसर के उपचार में महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऑपरेशन के बाद संक्रमण का जोखिम भी कई गुना रहता है। मतली और उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए सर्जरी के बाद 13 दिन तक मरीज को पूरी तरह चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। मरीज की हालत में आए सुधार के बाद अब वह स्वस्थ है।
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