जिले में शुक्रवार को मौसम का तेवर बदल गया। आसमान में बदली छाई रही और दिनभर तेज हवा चलने से गेहूं की फसल धराशायी हो गई। जिन किसानों ने एक-दो दिन पहले फसल की सिंचाई की थी, उसी को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।
एकबारगी मौसम के बदलने से खेती के जरिए दो वक्त की रोजी-रोटी का जुगाड़ करने वाले किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिख रही हैं। उनका कहना है कि यदि बारिश के साथ ओले गिर गए तो उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
इस बार जिले में डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर गेहूं की फसल की बोआई की गई है। अब लगभग किसानों की गेहूं की फसल तैयार हो गई है। महज एक बार और गेहूं की फसल की सिंचाई करना बाकी है। सुबह अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बदली छा गई।
तेज हवा चलने लगी। इससे खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई। कुछ किसानों ने एक-दो दिन पहले ही फसल की सिंचाई की थी। खेत में नमी होने के कारण गेहूं की फसल गिर गई।
जिले के राही, सतांव, महराजगंज, दीनशाहगौरा, ऊंचाहार, जगतपुर, सलोन, डीह, बछरावां, हरचंदपुर, खीरों आदि ब्लॉक क्षेत्रों में करीब 20 फीसदी गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई। मौसम के बदले तेवर से किसानों अपनी फसल को लेकर चिंतित हैं। यदि बारिश या फिर ओेले गिरते हैं तो किसानों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
तिलोई तहसील क्षेत्र के सेमरौता गांव के किसान बाबू मौर्या, अरुण मिश्रा और तिलोई गांव के किसान लालता प्रसाद व देवता मौर्या का कहना है कि गेहूं की लगभग फसल तैयार हो चुकी थी। एक पानी और देना था बस। हवा के चलने से फसल जमीन में गिर गई है।
इससे अब जहां गेहूं पतला होगा, वहीं इसका असर फसल उत्पादन पर पडे़गा। किसान कहते हैं कि हवा की वजह से अधिकतर सभी किसानों की कुछ न कुछ फसल गिरी है। बारिश या फिर ओले गिरते हैं तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी सतीश पांडेय का कहना है कि हवा चलने की वजह से निश्चित तौर से गेहूं की फसल गिरने से किसानों को नुकसान हुआ है। कितनी फसल गिरी है, इसका तो आंकलन करने के बाद ही सही जानकारी हो पाएगी। पर लगभग 20 फीसदी फसल जरूर गिरी है। किसान भाइयों को चाहिए कि यदि हवा चलते तो फसल की सिंचाई न करें।