हरिओम की पत्नी संगीता व बेटी अनन्या।
रायबरेली। पति की मौत के बाद मेरी दुनिया ही उजड़ गई... खुद कमाकर परिवार चलाती हूं। पति की हत्या के बाद मेरी दिमागी ठीक हालत भी ठीक नहीं है। हमने दूसरी शादी भी नहीं की और पति को ही सब कुछ माना। पहले पति के अंतिम संस्कार में उन्हें शामिल नहीं होने दिया गया अब हमें तेरहवीं कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी। ससुरालीजन मेरे साथ नाइंसाफी कर रहे हैं। यह दर्द हरिओम की पत्नी पिंकी उर्फ संगीता ने मंगलवार को बयां किया।
फतेहपुर जिले के हरिओम वाल्मीकि को ईश्वरदासपुर रेलवे स्टेशन के पास ग्रामीणों ने चोर समझ पीट-पीटकर मार डाला था। घटना के समय वह अपनी ससुराल नई बस्ती ऊंचाहार देहात आ रहे थे। मंगलवार को उनकी पत्नी ने बातचीत के दौरान अपना दर्द साझा किया। बताया कि शादी के समय पति की बीमारी का पता नहीं चला। शादी के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होती गई। बेटी के जन्म के बाद जैसे-तैसे तीन साल गुजारे। फिर मजबूरी में मायके आई और एनटीपीसी में साफ-सफाई काम कर दो वक्त की रोटी का इंतजाम किया।
पिंकी ने बताया कि पति हरिओम उनके पास आते-जाते रहते थे। चार माह पहले भी आए थे और बीते 25 सितंबर को वह अपनी ससुराल भी गई थीं। सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन एक झटके ने हमारी मांग सूनी कर दी। हमें ससुराल वालों से लगाव है हम उनके साथ मिलकर रहना चाहते हैं, लेकिन वह हमारे साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।
मेरी ससुराल जो भी गया, किसी ने हरिओम की पत्नी व बेटी के बारे में नहीं पूछा। सोमवार को पति की तेरहवीं भी हो गई। बावजूद ससुराल वालों ने उन्हें व उनकी बेटी को नहीं बुलाया। कैसे जीवन की नइया पार होगी, यही सोचकर परेशान हूं। कम से कम मेरा नहीं, बेटी का ही ख्याल ससुरालवालों को करना चाहिए।