दबाव में कंपनी ने उसे हटाने की जगह रामपुर भेज दिया
सीएम को भेजी गई शिकायत में बताया गया है कि अंकित चौधरी जब मुरादाबाद में तैनात था तो तत्कालीन आरटीओ ने उसे चोरी का वाहन पंजीकृत करने के मामल में हटाने के लिए पत्र लिखा था। उस पर एफआईआर भी हुई थी। दबाव में कंपनी ने उसे हटाने की जगह रामपुर भेज दिया।
इसके बाद जब सिल्वर टच को जिम्मेदारी मिली तो उसे संभल में तैनात कर दिया गया। साथ ही मुरादाबाद का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया। इसी क्रम में हाल ही में अंकित चाैधरी पर संभल में भी एफआईआर दर्ज हुई है। आवेदक से डीएल पर 800 रुपये अतिरिक्त वसूलने व बाबुओं से मारपीट के मामले में शिकायत हुई थी।
इसलिए मेहरबान है एजेंसी
सूत्र बताते हैं कि सिल्वर टच एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर दुष्यंत सिंह व प्रतिनिधि श्याम मोहन अग्निहोत्री एजेंसी के तहत काम करने वाले 125 प्राइवेटकर्मियों से प्रतिमाह सैलरी की वसूली करते हैं। यह सैलरी कर्मियों से एडवांस में लेकर उन्हें बा में क्रेडिट की जाती है।
सैलरी वसूलने की जिम्मेदारी एजेंसी प्रतिनिधियों ने अंकित चौधरी को सौंप रखी है। यही वजह है कि एजेंसी अंकित चाैधरी के बचाव में लगी है। हालांकि प्रोजेक्ट मैनेजर दुष्यंत सिंह ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। पर, दागी कर्मी की तैनाती के मामले में चुप्पी साध लेते हैं।
एजेंसियों से पूछताछ शुरू, हो सकती हैं ब्लैकलिस्ट
डीएल कर्मियों से नियुक्ति के नाम पर वसूली के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद डीएल एजेंसियों से पूछताछ शुरू हो गई है। सूत्र बताते हैं कि प्रतिनिधियों को बुलाकर आरोपों की पड़ताल की जा रही है। इतना ही नहीं मामले में दोषी पाए जाने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है, ऐसी आशंका जताई जा रही है।
प्रतिनिधियों को बुलाकर पूछताछ की जा रही
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि डीएल बनाने वाली एजेंसियों के खिलाफ लगातार शिकायतें आ रही हैं। सीएम कार्यालय में भी पीड़ित कर्मी पहुंचे हैं। एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए पीड़ितों से शिकायतें ली गई हैं। प्रतिनिधियों को बुलाकर पूछताछ की जा रही है।