पावर हाउस डलमऊ से सरेनी और मलकेगांव विद्युत उपकेंद्रों को आने वाली लाइन में फॉल्ट आने से 200 गांवों की बिजली आपूर्ति ठप है।
इससे लगभग पौने दो लाख आबादी 24 घंटे से न सिर्फ अंधेरे में है। बल्कि पानी के लिए हाहाकार मचा है। 12 पानी की टंकियों के अलावा पांच हजार से ज्यादा निजी और सरकारी नलकूप भी बिजली के अभाव में बंद हो गए हैं।
इससे किसान फसलों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इंजीनियरों की टीम पहुंचकर फॉल्ट ठीक करने में जुटी है। डलमऊ से सरेनी ब्लॉक के मल्केगांव और सरेनी विद्युत उपकेंद्र को बिजली मिलती है।
दोनों उपकेंद्र से पूरे ब्लॉक क्षेत्र के छोटे-बड़े 200 गांवों को बिजली आपूर्ति होती है। मल्के गांव से तेज गांव, रामपुर कला, रालपुर, खजूर गांव फीडर निकले हैं। इन फीडरों से करीब 100 गांवों को आपूर्ति होती है।
इसी तरह सरेनी विद्युत उपकेंद्र के हसनापुर, भोजपुर, देवपुर, नीवी फीडर से 100 गांवों को आपूर्ति होती है। सोमवार रात डलमऊ से सरेनी आने वाली लाइन में फॉल्ट आने से सभी 200 गांवों की आपूर्ति ठप हो गई।
इससे करीब पौने दो लाख आबादी अंधेरे जहां 24 घंटे से अंधेरे में हैं। वहीं बिजली आपूर्ति ठप होने से मंगलवार को 12 पानी की टंकियों से लोगों को जलापूर्ति नहीं हो सकी। सैकड़ों निजी कारखाने ठप हैं।
यही नहीं सरकारी और निजी नलकूप ठप होने से किसान फसलों की सिंचाई का कार्य नहीं कर पाए। वहीं बैंकों, शिक्षण संस्थानों के अलावा अन्य कार्यालयों में जेनरेटर चलाकर कामकाज निपटाना पड़ा।
कई स्थानों पर तो डीजल ही खत्म हो गया, जिससे उन्होंने मोमबत्ती की रोशनी से काम चलाया। किसानों ने बताया कि यदि जल्द बिजली की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो गेहूं की फसल सूख जाएगी।
धूप होने के कारण फसलों की सिंचाई करना जरूरी है। क्षेत्रीय लोगों में रामनरेश सिंह, मुन्नू तिवारी, राममोहन अवस्थी, मोनू सिंह के अलावा किसान गिरीश बहादुर, दुर्गासिंह, रमेश तिवारी व राकेश शुक्ला आदि ने बताया कि यदि जल्द फॉल्ट ठीक नहीं हुआ तो फसल बर्बाद हो जाएगी। साथ ही बच्चों की पढ़ाई बाधित होगी।
पावर कॉर्पोरेशन के जेई शैलेंद्र कुमार मौर्य ने बताया कि सब स्टेशन डलमऊ से सरेनी क्षेत्र के दो उपकेंद्रों को जाने वाली लाइन में फॉल्ट आया है। फॉल्ट कहां पर आया, इसका पता लगाया जा रहा है। जल्द फॉल्ट ठीक करके बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी।