रायबरेली। जिले में रिंग रोड फेज-दो के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस दायरे में आने वाले सरकारी और निजी पेड़ों को कटवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही इसके लिए सड़क परिवहन एवं राज्यमार्ग मंत्रालय व वन विभाग संयुक्त सर्वे कराएगा। पेड़ों को कटवाने के बाद निर्माण कार्य में और तेजी आएगी। भूमि अध्याप्ति विभाग की ओर से ज्यादातर किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है।
21 गांवों से होकर निकलने वाले इस रिंग रोड के बनने से जाम की समस्या से राहत मिल जाएगी। इससे लखनऊ से प्रयागराज जाने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश नहीं करना पड़ेगा। रिंग रोड डिडौली स्थित महिंद्रा एजेंसी से सैदनपुर, सुलखियापुर, पासापुर, परिगवां, अलादपुर, कंचौदा नानकारी, चकलोहराहार, डिडौली, लोहरामऊ, सलारपुर, नौबती, दरीबा, रेती खुर्द बुजुर्ग, बिनोहरा, फकरुलहसन खेड़ा, मछेछर, पासापुर, सुल्तानपुर आइमा, बेलाभेला, कुचरिया, सरायदामो होते हुए भांव गांव के पास रायबरेली-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग को जोड़ेगी।
इस दायरे में कई सरकारी और निजी पेड़ आ रहे हैं। इन पेड़ों को कटवाने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। संयुक्त सर्वे के बाद सरकारी पेड़ों को वन निगम और निजी पेड़ाें को निर्माण इकाई कटवाएगी। निर्माण इकाई को पेड़ कटवाने से पहले वन विभाग से अनुमति लेनी होगी।
मुआवजा लिया, अब चोरी से बेच रहे पेड़
रिंग रोड के निर्माण के लिए करीब 5100 किसानों से भूमि अधिग्रहण की गई है। इन किसानों को 320 करोड़ रुपए दिए जाने हैं। अब तक 3,600 किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। मुआवजे में किसानों को पेड़, मकानों का आकलन करके 270 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद किसान चोरी से पेड़ों को बेच रहे हैं। इस पूरे खेल में वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है।
जल्द कराया जाएगा संयुक्त सर्वे
रिंग रोड के निर्माण के दायरे में आने वाले सरकारी और निजी पेड़ों को कटवाया जाना है। सर्वे होने के बाद पता चलेगा कि कितने सरकारी व कितने निजी पेड़ हैं।
- आशुतोष जायसवाल, डीएफओ