शहर के रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार करते यात्री।
रायबरेली। जिले के सभी रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों के ठहराव की औसत अवधि दो-चार मिनट है, लेकिन बुधवार को चार ट्रेनें 15 से 45 मिनट तक रोकी गईं। इन ट्रेनों को ऐसे स्टेशनों पर रोका गया, जहां यात्रियों को तपिश भरी गर्मी से जूझना पड़ा। पानी भी नहीं मिला।
सिंगरौली से टनकपुर जाने वाली त्रिवेणी एक्सप्रेस रायबरेली में आधे घंटे तो बछरावां में एक घंटे देर से पहुंची। बीच में बिना स्टॉपेज वाले स्टेशन पर करीब आधे घंटे रोका गया। पता चला कि जब तक पीछे चल रही प्रतापगढ़-कानपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस आगे नहीं निकल जाती, तब तक त्रिवेणी एक्सप्रेस खड़ी रही। इससे यात्री ट्रेन से निकल कर बाहर टहलने लगे।
प्रयागराज से लखनऊ जाने वाली गंगा गोमती एक्सप्रेस ऊंचाहार में 15 मिनट रोकी गई। लेटलतीफी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि यह ट्रेन रायबरेली में एक घंटे देर से पहुंची। सवा घंटे लेट चल रही नौचंदी एक्सप्रेस के इंतजार में गंगा गोमती का संचालन प्रभावित हुआ। कानपुर-प्रयागराज पैसेंजर वैसे तो रास्ते में कई जगह देर तक रुकी, लेकिन इस ट्रेन को अरखा स्टेशन पर पौन घंटे तक रोक दिया गया तो लेटलतीफी सवा घंटे हो गई।
इससे यात्रियों में आक्रोश रहा। रायबरेली-ऊंचाहार पैसेंजर को लक्ष्मणपुर स्टेशन पर 30 मिनट रोका गया। लक्ष्मणपुर और अरखा में पेयजल के समुचित प्रबंध न होने से गर्मी में यात्रियों को भटकना पड़ा। ट्रेन न छूट जाए, इस डर में स्टेशन से बाहर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके।
यातायात निरीक्षक बाल मुकुंद ने बताया कि दूसरी ट्रेनों को पास कराने के लिए गाड़ियां रोकनी पड़ीं। ट्रेनें सुचारू रूप से दौड़ें और यात्रियों को कोई असुविधा न हो, इसका ध्यान रखा गया।