रायबरेली। रंग मंच में अहम पहचान बनाने वाले और लाइट एंड साउंड ड्रामा को आमजन के बीच लाने वाले विलायत अली जाफरी रायबरेली में ही जन्मे थे। उनका ताल्लुक इस जिले के नामी परिवार से था। उनके बहनोई पूर्व मंत्री वसी नकवी थे।
शुरुआती तालीम के बाद भले ही वह रायबरेली छोड़कर चले गए, लेकिन बीच-बीच में यहां आकर रिश्ता बनाए रखा। आखिरी बार वह पिछले साल 2019 में मुहर्रम से पहले आए थे। सोमवार को मुंबई में उनका निधन हो गया। उनकी इच्छानुसार उन्हें रायबरेली में ही सुपुर्द -ए-खाक किया जाएगा।
यानी कि अब वह हमेशा के लिए यहीं के होकर रह जाएंगे। विलायत जाफरी का जन्म 02 अक्तूबर 1935 को रायबरेली में हुआ था। वह शहर के खाली सहाट स्थित पीली कोठी के रहने वाले थे। नजदीकियों का कहना है कि उनकी शुरुआती तालीम यही पर हुई।
आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ और फिर दिल्ली चले गए। 1970 में निकाह के बाद वह लखनऊ में ही बस गए। कानपुर में रेडियो में काम करने के बाद वह दूरदर्शन में लंबे समय तक जुड़े रहे। वह दूरदर्शन के डायरेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए।
उनकी पत्नी कृष्णा जाफरी रेडियो लखनऊ से जुड़ी रहीं। उनका एक बेटा और तीन बेटियां हैं। परिवार के ही सदस्य मीसम नकवी बताते हैं कि विलायत जाफरी उनके पापा के मामू थे। इस तरह विलायत से उनका रिश्ता नाना-नाती का था। वह पिछले साल मोहर्रम से कुछ दिन पहले यहां आए थे।
इसके बाद लखनऊ लौट गए। बीमारी की वजह से वह फिर नहीं आ सके। पूर्व मंत्री वसी नकवी जाफरी के साले थे, जिनका काफी रुतबा था। उनको राना नगर स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए- खाक किया जाएगा। वसी नकवी के पौत्र मुजतबा अजहर नकवी बताते हैं कि बुधवार को विलायत जाफरी का पार्थिव शरीर पीली कोठी लाया जाएगा और फिर सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।