जिले में तीन लाख 85 हजार किसान हैं। फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए इस बार कृषि विभाग को शासन की ओर से 24 हजार जैव उर्वरक के पैकेट दिए गए थे।
इसमें कृषि विभाग को फास्फेटिका, एजोटोवैटर कल्चर नाम के जैव उर्वरक के पैकेट आए थे। एक पैकेट की कीमत नौ रुपये है। इसमें 75 फीसदी अनुदान किसानों को देने की व्यवस्था है।
जैव उर्वरक का प्रयोग करने से फसल उत्पादन बढ़ता है। लापरवाही की बानगी देखिए, जिला मुख्यालय से जिले के सभी बीज भंडारों जैव उर्वरक के पैकेट उपलब्ध करा दिए गए हैं।
बावजूद इन्हें किसानों में वितरण नहीं किया गया। जिला मुख्यालय स्थित बीज भंडार के बाहर जैव उर्वरक के पैकेट रख दिए गए हैं, जो सीलन पाने से खराब हो गए हैं।
ये पैकेट अक्तूबर महीने के हैं। यही नहीं गोदाम के बाहर कूड़े तक में पैकेट फेंक दिए गए हैं। यही हाल अन्य ब्लॉकों का है, जहां पर जैव उर्वरक पैकेट किसानों में वितरण में मनमानी की गई है।
बावजूद इस ओर न तो अधिकारियों की नजर पड़ रही और न ही कर्मचारियों की। किसान सूखे की वजह से परेशान हैं। गेहूं की बोवाई नहीं हो पा रही है। बावजूद कृषि योजनाओं का लाभ दिलाने में अंधेरगर्दी की जा रही है।
बीज गोदाम प्रभारी जयपाल सिंह सोलंकी का कहना है कि 24 हजार जैव उर्वरक पैकेट आए थे। सभी को वितरण के लिए बीज भंडार केंद्रों पर भेजा था।
तीन माह तक ही जैव उर्वरक सही रहता है। हो सकता है कि सीलन से खराब हो गए हों। यदि मनमानी बरती गई तो इसे दिखवाया जाएगा।
उप कृषि निदेशक, महेंद्र सिंह ने कहा कि जैव उर्वरक के पैकेट किसानों में देने के लिए आए थे। सभी पैकेट बीज भंडारों में भेज दिए गए थे। पैकेट कूड़े में फेंक देने की जांच करा दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।