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ट्रक से कुचलकर तीन की मौत, तीन गंभीर

Tue, 16 May 2017 12:25 AM IST
रायबरेली/ अमर उजाला ब्यूराे
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सड़क दुर्घटना। - फोटो : demo
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बिजली के पोल लगाने के लिए प्रतापगढ़ जा रहे श्रमिकों को एक बेकाबू ट्रक ने रौंद दिया। इसमें तीन की मौत हो गई, जबकि तीन गंभीर रूप से घायल हो गए। मरने वालों में दो रतंसीपुर और एक कासो पहाड़पुर गांव का रहने वाला था।
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बताया जा रहा है कि कुंडा के पास किसी काम से सभी उतरे थे। इसी दौरान ट्रक रौंदता हुआ आगे बढ़ गया। दो शवों के पीएम यहां और एक का पीएम प्रतापगढ़ जिले में कराया गया। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों के गांव के लोग राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत बिजली पोल लगाने का कार्य करते हैं।

एक ठेकेदार के जरिए करीब 10 श्रमिक ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार होकर प्रतापगढ़ जा रहे थे। बताते हैं कि कुंडा के पास किसी काम से नीचे उतरे थे। इसी बीच पीछे से आ रहा एक ट्रक अनियंत्रित हो उन लोगों को रौंदते हुआ आगे बढ़ गया।
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इससे पहले कि आसपास के लोग कुछ समझ पाते, चालक ट्रक लेकर फरार हो गया। गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र कुमार यादव (29) पुत्र राम दयाल, सुधीर पांडेय (40) पुत्र हरिश्चंद्र निवासी विक्रमाजीत रतंसीपुर थाना मिल एरिया और अंकित (18) पुत्र रामलखन निवासी कासो पहाड़पुर थाना हरचंदपुर की मौके पर ही मौत हो गई।

वहीं सुरेंद्र (17) निवासी कासो पहाड़पुर हरचंदपुर, प्रदीप (16) निवासी सतई का पुरवा सदर कोतवाली और विक्रम (23) निवासी पूरे बिहारी डीह को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रायबरेली में भर्ती कराया गया है। हादसे की सूचना पर परिवारीजन भी जिला अस्पताल पहुंच गए।

सदर कोतवाल सुधीरचंद्र पांडेय का कहना है कि हादसा प्रतापगढ़ जिले में हुआ था। मृतक वीरेंद्र व अंकित के शवों का पीएम रायबरेली में और सुधीर के शव का पीएम प्रतापगढ़ में किया गया। रतंसीपुर के ग्राम प्रधान रामकुमार मौर्य कहते हैं कि सभी पोल लगाने के लिए ही प्रतापगढ़ जा रहे थे।

इसी दौरान हादसा हुआ। इसमें वीरेंद्र, अंकित व सुधीर की मौत हुई है, जबकि तीन अन्य घायल हुए हैं। इसी के जरिए रोजी-रोटी चलती थी। वीरेंद्र, अंकित और सुधीर की मौत की सूचना जब उनके घर पहुंची तो परिवारीजनों में कोहराम मच गया।

रोते-बिलखते परिवारीजन जिला अस्पताल पहुंचे, जहां उनके आंसू नहीं थम रहे थे। मृतक अंकित के पिता रामलखन और वीरेंद्र के पिता रामदयाल कभी रोते तो कभी उन मनहूस समय को कोसते, जब दोनों घर से निकलते थे। सुधीर के परिवारीजन के भी आंसू नहीं थम रहे थे।
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