रायबरेली। जिले में संक्रामक रोगों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। 24 घंटे में जिला अस्पताल में बुखार व डायरिया की चपेट में आने के बाद भर्ती कराए गए बच्चों में तीन की मौत हो गई है।
बुखार से पीड़ित 30 से अधिक बच्चों को बच्चा वार्ड में इलाज किया जा रहा है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में भी लगातार रोगियों की संख्या बढ़ रही है।
मौसम में बदलाव के साथ ही संक्रामक रोगों का कहर बढ़ गया है। समय रहते स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को मच्छरों से बचाने के लिए बंदोबस्त नहीं किए। इसी का नतीजा है कि जिले में लोगों को संक्रामक रोगों की चपेट में आकर अपनी जान गवां रहे हैं।
जिला अस्पताल में लालगंज क्षेत्र के टटियापुर गांव के विनोद कुमार ने अपने छह साल के बच्चे युवराज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। उसकी इलाज के दौरान बृहस्पतिवार देर राम मौत हो गई।
इसके अलावा सलोन क्षेत्र के कांजीहार निवासी आंचल (9) और रोहनियां निवासी मनीष कुमार (10) की भी बुखार की चपेट में आने के बाद जिला अस्पताल में इलाज के दौरान शुक्रवार को मौत हो गई।
जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक माह के अंदर 20 से अधिक नवजात भी दम तोड़ चुके हैं। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड के सभी बेड फुल हैं।
बच्चा वार्ड में शिवांशु, आरोही, निशांत, अर्पित, राकेश, संजय, अंकुर, सीमा, आरती समेत 30 से अधिक बच्चों का इलाज किया जा रहा है। मैटरनिटी विंग में नवजातों के इलाज के लिए स्थापित न्यू सिक बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के भी सभी 10 बेड पांच दिनों से फुल हैं।
ऐसे में नवजातों को भी इलाज के लिए लखनऊ भेजा जा रहा है। तमाम लोग नवजातों को लखनऊ न ले जाकर जिला अस्पताल में भर्ती करवा रहे हैं।
जिला अस्पताल के डॉ. बीरबल का कहना है कि बदलते मौसम में लोग सतर्क रहें। खानपान का विशेष ख्याल रखें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
कहा कि बुखार या डायरिया होने पर लोग स्वयं डॉक्टर न बने। तबियत खराब होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और सलाह लें। इलाज में देरी या लापरवाही जानलेवा हो सकती है।
जिला अस्पताल में इलाज की समुचित व्यवस्था है। दवाएं भी पर्याप्त हैं। तमाम रोगियों को यहां लाकर भर्ती कराने में देरी हो जाती है। यदि समय से रोगियों को यहां लाकर भर्ती करा दिया जाए तो उनका इलाज आसानी से हो जाएगा। खासकर बच्चा वार्ड में एक चिकित्सक को हर समय रहने के आदेश दिए गए हैं।- डॉ. एनके श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल