बेटे अंकेश के पार्थिव शरीर के सामने बिलखती मां विमन देवी और परिवार के अन्य सदस्य।
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गदागंज (रायबरेली)। सेना के जवान बुधवार को बलिदानी अंकेश तिवारी का पार्थिव शरीर जैसे ही लेकर पहुंचे पूरा गांव रो पड़ा। परिवारजनों में चीख पुकार मच गई। अंतिम दर्शन के लिए लोग उमड़ पड़े। सेना की ओर से अंकेश की मौत का कारण न बताने से नाराज परिवारजनों ने शव का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया।
मौके पर पहुंचे क्षेत्राधिकारी व उप जिलाधिकारी ने घर वालों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। देर शाम तक पार्थिव शरीर दरवाजे पर ही रखा रहा। बाद में ऊंचाहार विधायक के समझाने पर परिजन अंकेश के अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए। गदागंज के मनिहर गर्वी सुदामापुर निवासी राम प्रकाश तिवारी का बेटा भारतीय सेना में सिपाही के पद पर गुवाहाटी के शिलांग बॉर्डर पर तैनात थे।
रविवार को घर वालों को अंकेश के बलिदान होने की सूचना मिली। हर कोई उनकी मौत का कारण जानना चाहता है। सेना के वाहन से बुधवार को दोपहर करीब एक बजे पार्थिव शरीर गांव लाया गया। मृतक के पिता रामप्रकाश तिवारी का कहना है की सेना की ओर से उनके बेटे के बलिदान होने की सही जानकारी नहीं दी जा रही है।
बेटे की मौत कैसे हुई इस पर कुछ भी सेना के जवान बताने को तैयार नहीं हैं। दादा गया प्रकाश तिवारी, चाचा राजन तिवारी, सत्येंद्र तिवारी, माता विमन तिवारी, दादी राजपती का रो-रोकर बुरा हाल है। उप जिलाधिकारी सिद्धार्थ कुमार व क्षेत्राधिकारी डलमऊ अरुण कुमार ने परिवारजनों से बात की, लेकिन अंतिम संस्कार को लेकर वह तैयार नहीं हुए।
दादा गया प्रकाश तिवारी ने बताया कि रविवार दोपहर एक बजे बेटे से बात हुई थी, तक तक सब ठीक था, लेकिन इसके बाद क्या हुआ, किसी को कुछ पता नहीं है। 15 फरवरी को भाई की शादी में शामिल होने के लिए अंकेश घर आए थे। पांच मार्च को ड्यूटी पर वापस चले गए। अचानक घटी घटना के बाद से परिजन सदमे में हैं।