रायबरेली। प्रदेश सरकार ने धान खरीद की तारीख सात मार्च तक बढ़ाकर भले ही किसानों को राहत देने की कोशिश की हो, लेकिन यह आदेश जिले में मजाक बनकर रह गया है। केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं और धान की खरीद पूरी तरह बंद हो गई है। किसान केंद्रों से बैरंग लौट रहे हैं।
जिले में इस बार धान खरीद शुरुआती दौर से ही पटरी से उतरी रही। कभी केंद्र प्रभारियों तो कभी बिचौलियों की मनमानी से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
धान खरीद की अंतिम तारीख 28 फरवरी तय थी, लेकिन सरकार ने किसानों को राहत देेते हुए अब धान खरीद का समय सात मार्च तक बढ़ा दिया है। बावजूद इसके जिले के सभी केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं। किसान धान लेकर पहुंचते हैं और ताला लटकते देख वापस लौट आते हैं।
जगतपुर, ऊंचाहार, सतांव, खीरों, दीनशाहगौरा समेत अन्य ब्लॉक क्षेत्रों के क्रय केंद्रों पर तालाबंदी है। सवाल उठता है कि जब सरकार ने आदेश दिया है तो केंद्रों में तालाबंदी क्यों है। केंद्र प्रभारियों की मनमानी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
1.74 लाख मीट्रिक टन खरीदा गया धान
जिले में 71 क्रय केंद्रों पर धान खरीद शुरू कराई गई थी। एक लाख 72 हजार मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष इस बार एक लाख 74 हजार मीट्रिक टन धान खरीद की गई है। अधिकारियों का दावा है कि लक्ष्य से अधिक धान खरीदा गया है। अफसर दावा कर रहे हैं कि अब किसानों के पास बेचने के लिए धान ही नहीं बचा है।
सरकार की तरफ से धान खरीद का समय बढ़ा दिया गया है। इसकी जानकारी हुई है। केंद्र प्रभारियों को क्रय केंद्र खोलकर धान की तौल करने के लिए कहा गया है। आदेश का पालन न करने वाले प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
रामानंद जायसवाल, डिप्टी आरएमओ