बाराबंकी। कोठी थाना क्षेत्र में 14 बंदरों की मौत के मामले में जांच हो रही है। सूत्रों ने बताया कि बंदरों को पकड़ने के दौरान हालत बिगड़ी तो उनका इलाज कराने के बजाय किसी वाहन से वहां डाल दिया गया।
अमेरुआ और डीहा रहीमपुर गांव के बीच 12 सितंबर की रात नौ बंदरों की तड़प कर मौत हो गई थी। रात में वन विभाग की टीम ने एक बंदर को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन 13 सितंबर की सुबह वहां छह और बंदरों के शव इधर-उधर पड़े मिले। वन विभाग के फॉरेस्टर सचिन पटेल ने बताया कि वन विभाग के अलावा पुलिस भी केस दर्ज कर जांच कर रही है।
सूत्र के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आ रहा है कि घटना स्थल से करीब आठ किलोमीटर दूर दूसरे थाना क्षेत्र के एक गांव में बंदरों को पकड़ने कोई टीम आई थी। आशंका प्रकट की जा रही है कि पकड़ने के दौरान उन्होंने बंदरों को जो अनाज खिलाया, उसमें कोई जहरीली दवा थी, जिसके खाने के बाद बंदरों की हालत बिगड़ी।
बंदरों की मौत के पीछे बहुत ही धीमा मगर घातक जहर सामने आया है। बताते हैं कि कुछ बंदरों की सांस चल रही थी, लेकिन संबंधित लोगों ने इलाज कराने के बजाए उन्हें फेंक दिया। कई बंदरों के मुंह से खून आने के बाद मौत हो गई।
सम्मान पूर्वक हुआ अंतिम संस्कार
वन विभाग ने बंदरों के शवों का अंतिम संस्कार करीमाबाद मलौली के जंगल में सम्मानपूर्वक किया। वहीं इस मामले का संज्ञान डीएम शशांक त्रिपाठी ने भी लिया है। डीएम ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।