रायबरेली। जाली दस्तावेज से बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) से करीब नौ करोड़ रुपये लोन लेने का मामला करीब आठ माह पहले ही उजागर हो गया था। रायबरेली से लेकर लखनऊ तक बैठे बैंक अफसर मामले को दबाने में जुटे थे। यही वजह है कि मामले में शामिल बैंक मैनेजर और फील्ड ऑफिसर समेत अन्य बैंककर्मियों का गुपचुप तबादला कर दिया गया। उच्चाधिकारियों के संज्ञान में प्रकरण आया तब सोमवार देर शाम प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
बीओबी की मुख्य शाखा में वर्ष 2024 और 2025 में जाली दस्तावेज पर ही 48 आवेदकों को 9.2 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत लोन दे दिया गया। मुख्य प्रबंधक मुकेश ने सोमवार शाम सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें भी ढिलाई बरती गई। न तो बैंककर्मियों के और न ही गारंटरों के नाम दर्ज कराए गए। इस बीच विवेचक जितेंद्र कुमार सिंह ने बुधवार को बैंक के मुख्य प्रबंधक से मामले से जुड़े सभी दस्तावेज तलब किए। बैंक अफसरों ने दस्तावेज सौंपने के लिए दो दिन का समय मांगा है।
विवेचक ने बैंक से मांगी ये जानकारी
-बीओबी में आवेदकों को व्यक्तिगत लोन देने की नियमावली क्या है।
-48 आवेदकों के खातों का रिकॉर्ड।
-गारंटरों के नाम, कहां के रहने वाले हैं।
-लोन के लिए कौन से दस्तावेज लगाए गए हैं।
-लोन पास करने वाली फाइल में किस अफसर व बैंककर्मी के हस्ताक्षर हैं।
बैंक शाखा से लेकर क्षेत्रीय कार्यालय तक जांच
लोन फर्जीवाड़े की बैंक शाखा से लेकर क्षेत्रीय कार्यालय तक जांच चल रही है। प्रकरण में किस अधिकारी व बैंककर्मी की क्या भूमिका रही है, इसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शैलेंद्र प्रताप सिंह, क्षेत्रीय प्रबंधक, बैंक ऑफ बड़ौदा
फर्जीवाड़े में शामिल लोगों पर होगी कार्रवाई
पहचान छिपाकर बैंक से 48 लोगों ने 9.2 करोड़ रुपये का लोन लिया है। विवेचना कराई जा रही है। मामले में चाहे आवेदक हैं या फिर बैंक अधिकारी, कर्मचारी या फिर अन्य लोग। सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। गंभीर धाराओं में सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
डॉ. यशवीर सिंह, पुलिस अधीक्षक-रायबरेली