रायबरेली। लखनऊ-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग पर करोड़ों रुपये की बंजर जमीन को भूमाफिया ने अपने नाम करा लिया। रजिस्ट्रार कानूनगो की जांच में इसका खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया। तहसील प्रशासन ने बंजर जमीन को खारिज करा दिया। साथ ही उस जमीन को पुलिस चौकी स्थापित कराने के लिए दे दी गई।
जानकारी के मुताबिक सदर तहसील क्षेत्र में हाईवे स्थित गुलूपुर गांव के पास छह बीघे जमीन बंजर में दर्ज थी। जिसकी कीमत दो करोड़ से ज्यादा है। भूमाफिया ने इस कीमती जमीन को सेटिंग-गेटिंग के चलते अपना नाम करा लिया। सदर तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो भानू त्रिपाठी ने इस मामले को पकड़ लिया।
इसकी जांच में पाया गया कि करोड़ों रुपये की बंजर जमीन को भूमाफिया ने अपने नाम करा लिया। कानूनगो ने इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी। इस पर उच्च अधिकारियों ने भूमाफिया के नाम दर्ज की गई जमीन को खारिज कर दिया। अब इस जमीन को हरचंदपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस चौकी स्थापित कराने के लिए दे दिया गया है।
जहां पर चौकी निर्माण कराने के लिए शिलान्यास करा दिया गया है। रजिस्ट्रार कानूनगो का कहना है कि चकबंदी विभाग के कुछ कर्मियों की मिलीभगत के चलते बंजर जमीन को भूमाफिया ने अपना नाम करा लिया था। सदर तहसील में तैनात रजिस्ट्रार कानूनगो भानू त्रिपाठी को महराजगंज तहसील तबादला कर दिया गया है।
कहा जा रहा है कि भूमाफिया की करतूत उजागर करना कानूनगो को महंगा पड़ गया। लंबी पहुंच के भूमाफिया ने कानूनगो का तबादला करा दिया। इस प्रकरण का खुलासा होने से जाहिर है कि सही काम करना भी महंगा पड़ रहा है। कानूनगो का तबादला किए जाने को लेकर लोगों में नाराजगी है।
एसडीएम सदर शशांक त्रिपाठी ने कहा कि हाईवे स्थित बंजर की जमीन को भूमाफिया ने अपने नाम करा लिया था। जमीन से उसका नाम खारिज कराकर उस जमीन को पुलिस चौकी स्थापित करने के लिए दे दिया गया है। रजिस्ट्रार कानूनगो भानू त्रिपाठी के तबादला किए जाने का मामला जानकारी में आया है। इसे दिखवाया जाएगा। कानूनगो के साथ न्याय होगा।