उद्योग बंधु समिति की बैठक में मौजूद अधिकारी व अन्य।
- फोटो : उद्योग बंधु समिति की बैठक में मौजूद अधिकारी व अन्य।
रायबरेली। लखनऊ में शुक्रवार को हुई मंडलीय उद्योग बंधु की बैठक में उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) की मनमानी के मुद्दे गूंजे। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने दोनों मामलों को गंभीरता से लिया। उन्होंने शहर के मिल एरिया में विकास शुल्क को तीन गुना बढ़ाकर की जा रही वसूली को रोक दिया। साथ ही यूपीसीडा से उद्योग केंद्र को वापस किए गए रायबरेली और अमेठी जिले के 14 औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए मिले बजट को भी वापस करने के निर्देश दिए।
बैठक में उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहिताश सिंह तूफानी ने कहा कि मिल एरिया के साइड एक और दो के विकास की जिम्मेदारी यूपीसीडा को दी गई है। उन्होंने मंडलायुक्त को बताया कि अब तक नगर पालिका आठ रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से विकास शुल्क लेता था, लेकिन जिम्मेदारी मिलते ही यूपीसीडा ने विकास शुल्क तीन गुना बढ़ाकर 24 रुपये कर दिया। यह भी स्पष्ट किया कि यूपीसीडा के स्तर से विकास शुरू नहीं कराया गया, लेकिन विकास के नाम पर उद्यमियों से तीन गुना अधिक रकम की वसूली शुरू कर दी गई है। मामले में मंडलायुक्त ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में नगर पालिका के हिसाब से ही विकास शुल्क लिया जाए। बढ़ा शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में नगर पालिका से स्थल के हिसाब से विकास शुल्क लेने की रिपोर्ट भी मांगी।
एसोसिएशन के अध्यक्ष ने यूपीसीडा से वापस लेकर उद्योग केंद्र को दिए गए 14 औद्योगिक क्षेत्रों के मामले को फिर सदन में उठाया। कहा कि 1986 में यूपीसीडा को ये क्षेत्र दिए गए थे। विकास कराने के लिए बजट भी दिया गया था, लेकिन यूपीसीडा ने काम नहीं कराया। उद्यमियों से विकास शुल्क भी वसूला है। यूपीसीडा पूरी की पूरी रकम उद्योग केंद्र को वापस करे, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कराया जा सके। इस संबंध में यूपीसीडा के अधिकारी ने कहा कि बजट को लेकर मूल्यांकन कराया जा रहा है। मामले में मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि यूपीसीडा अपने अधिकारी से मामले में निर्णय कराकर जल्द बजट वापस करे। एसोसिएशन के अध्यक्ष रोहिताश सिंह ने बताया कि जिले से संबंधित दो मामले बैठक में उठाया गए। इसमें मंडलायुक्त ने मिल एरिया में ज्यादा शुल्क की वसूली पर रोक लगाने के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र का बजट वापस करने के निर्देश यूपीसीडा को दिए।