रायबरेली। रेलवे ट्रैक पर स्लीपर रखकर नौचंदी एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश के मामले में डेढ़ माह बाद भी अब तक कोई खुलासा नहीं हो सका है। ट्रैक पर स्लीपर किसने रखा, इसका पता लगाने में नवाबगंज थाने की पुलिस फिलहाल नाकाम साबित हुई है। रेलवे सुरक्षा बल और राजकीय रेलवे पुलिस के हाथ भी खाली हैं।
पुलिस ने हादसे वाले दिन घटनास्थल के आसपास सक्रिय रहने वाले सभी मोबाइल नंबरों की तलाश कर उनके बारे में छानबीन भी कराई लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा। बीती 16 सितंबर की रात ऊंचाहार-फाफामऊ रेलखंड में जिले की सीमा के निकट स्थित प्रतापगढ़ के गौरी गांव के पास रेल लाइन पर स्लीपर रख दिया गया था। प्रयागराज की ओर से आने वाली नौचंदी एक्सप्रेस स्लीपर से टकराई थी। लोको पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया था। घटना की रिपोर्ट नवाबगंज थाने में दर्ज कराई गई थी। रेलवे प्रबंधन के साथ ही नवाबगंज थाने की पुलिस भी मामले की जांच कर रही है।
घटनास्थल के आसपास बसे गांवों वालों से भी पूछताछ कर उन अराजक तत्वों का पता लगाने का प्रयास किया गया, जिन्होंने ट्रैक पर स्लीपर रखा था। ग्रामीणों की ओर से भी इस संबंध में कोई भी जानकारी पुलिस को नहीं दी जा सकी। नवाबगंज थाना प्रभारी संतोष सिंह का कहना है कि मोबाइल नंबरों की पड़ताल के बाद भी अराजक तत्वों का पता नहीं चला है। जांच अभी चल रही है।