किसानों की स्थिति सुधारने के लिए न तो सरकारों ने ही कुछ किया और न ही सामाजिक स्तर पर ही कोई प्रयास दिखाई दिया। यहां 45 फीसदी से अधिक खरीफ की फसलें नष्ट हो चुकी हैं।
पांच प्रांतों का दौरा करने के बाद संवेदना यात्रा लेकर यहां पहुंचे यादव रविवार को पत्रकारों से रूबरू थे। उन्होंने कहा कि 14 दिन की संवेदना यात्रा के दौरान वे पूरी तरह से किसानों के दुख-दर्द की बात करेंगे।
यादव ने सूखे को देश की सबसे बड़ी त्रासदी बताया। उन्होंने एक संस्कृत पाठशाला में आयोजित बैठक में शिरकत की। कहा कि उन्होंने कर्नाटक के रायचूर जिले से 2 अक्तूबर को संवेदना यात्रा शुरू की है।
इसके बाद मराठवाड़ा में चार दिन रहे फिर मध्यप्रदेश के चित्रकूट होते हुए यूपी के बुंदेलखंड के झांसी, बांदा, कौशांबी, फतेहपुर होते हुए रायबरेली आया हूं।
उन्होंने सूखे को अदृश्य आपदा बताते हुए कहा कि यह सबसे पहले समाज के गरीब आदमी को अपना शिकार बनाता है। कहीं जानवरों को पीने का पानी नहीं है तो कहीं चारे का संकट है।
बारिश 10 फीसदी कम होने पर सूखा घोषित हो जाता है। यहां तो 14 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है। उन्होंने कहा कि राहत दे सकने वाली योजना मनरेगा की दशा सभी जगहों पर खराब है। मुख्यमंत्री को वे पत्र लिखकर वे इन परिस्थितियों मे किसानों को राहत देने के उपाय बताएंगे।