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जिले में सड़कों की हालत जर्जर, 32 लाख लोगों की जोखिम में जान

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रायबरेली में गुरुवार को रायबरेली-कानपुर राजमार्ग पर इस तरह सेमरी चौराहे पर गड्ढ़ा। - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र में सड़कों की हालत जर्जर है। यहां न तो चलने लायक हाईवे हैं और न ही राजमार्ग। मरम्मत और नवीनीकरण के नाम पर अरबों रुपये पानी की तरह बहा दिए गए, लेकिन जिले की 32 लाख आबादी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर है।
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लोक निर्माण विभाग व एनएचएआई के अलावा नगर पालिका परिषद, आरडीए, जिला पंचायत, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सड़कों का रखरखाव करता है, लेकिन सुधार नहीं हो रहा है। सबसे ज्यादा बदहाल जिला पंचायत से बनी सड़कें हैं। ज्यादातर मार्ग ध्वस्त हो गए हैं।
डामर तक गायब हो गया है। लोक निर्माण विभाग के दो प्रमुख जिला मार्ग, छह राज्यमार्ग, 52 अन्य जिला मार्ग और 1830 सड़कें हैं। अफसर इन सड़कों की बदहाली की वजह बजट न होना बता रहे हैं।
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शहर में सीवर पाइप लाइन बिछाए जाने के दौरान नेहरू नगर रेल क्रॉसिंग से मनिका की ओर जाने वाली सड़क को उखाड़ दिया गया। यह कार्य हुए एक साल से ज्यादा का समय बीत गया, लेकिन मरम्मत अब तक नहीं कराई गई। यह मार्ग पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस के अलावा रायबरेली-लखनऊ हाईवे को जोड़ता है। वाहनों से निकलने से धुल का गुबार उड़ता है। इससे आसपास के लोग परेशान हैं।
शहर के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज से होते हुए विकास भवन, कलक्ट्रेट व सदर तहसील को जोड़ने वाला मार्ग पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। इस मार्ग से अधिकारी और फरियाद लेकर सभी लोग आते-जाते हैं। मार्ग खराब होने से परेशानियों का भी सामना करते हैं। इस मार्ग का निर्माण आरडीए को कराना है, लेकिन अफसर ध्यान नहीं देते हैं। तहसील और आबकारी कार्यालय के सामने मार्ग पूरी तरह ध्वस्त है।
शहर में बस स्टेशन से रतापुर के पास रायबरेली-लखनऊ हाईवे को जोड़ने वाला मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इस मार्ग से लखनऊ की तरफ जाने वाली रोडवेज बसें भी निकलती है। इसी मार्ग पर गल्ला और सब्जी मंडी भी है। व्यापारी खरीददारी के लिए इसी मार्ग से आते-जाते हैं। आए दिन लोग सड़क दुर्घटना के शिकार होते रहते हैं। अफसरों को यह बदहाली दिखाई नहीं देती।
जितेंद्र मिश्रा, बाबू पाठक ने कहा कि शहर में भी सड़कें ध्वस्त हैं। सड़कों की मरम्मत कराने के नाम पर आए धन में भी घपला किया गया। बदहाल सड़कों की वजह से आए दिन जाम से जूझना पड़ता है। मनीष तिवारी, राजन ने कहा कि सड़कों की हालत इतनी खराब है कि पैदल भी निकलना मुश्किल है। लग्जरी वाहनों पर सवार अधिकारियों को यह बदहाली नहीं दिखाई देती। यही वजह है कि सड़कों की हालत नहीं सुधार रहे हैं।
खीरों ब्लॉक में सेमरी-कानपुर हाईवे ध्वस्त हो गया है। डामर तक गायब हो गया है। इस राजमार्ग से प्रतिदिन 20 हजार लोग आते-जाते हैं। पांच वर्ष पूर्व इस मार्ग का चौड़ीकरण का काम शुरू हुआ था। इसके तहत सड़क के किनारे स्थित किसानों की जमीनों को अधिग्रहित करके उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है, लेकिन सड़क का चौड़ीकरण व मरम्मत कार्य नहीं होने से जगह-जगह सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है।
केतनापुर के धर्मपाल, देवगांव के देवेंद्र यादव ने बताया कि मार्ग ध्वस्त है। वाहन निकलने से धूल उड़ रही है। आए दिन गड्ढों में वाहन फंस जाते हैं। लालगंज के पास स्थित टोल टैक्स बचने के चक्कर में ज्यादातर वाहन इस मार्ग से ही निकलते हैं। रायबरेली-लखनऊ राजमार्ग से निकला अचाकापुर, डिहिवा, पूरे लखनउहा, बसंत खेड़ा, शोभापुर, पूरे गुलाब सिंह सिंह गांव को जोड़ने वाला मार्ग ध्वस्त है।
संतोष मिश्रा, केतन पाल ने कहा कि मार्ग की मरम्मत कई सालों से नहीं कराई गई है। आए दिन लोग गिरकर चुटहिल हो जाते हैं। कई जगह किनारे की सड़क भी बह गई है। आए दिन लोग गिरकर चुटहिल हो रहे हैं। मुराईबाग कस्बे से गंगापुल होते हुए फतेहपुर को जोड़ने वाला गड्ढों में तब्दील हो गया है। इस मार्ग से भारी वाहनों का आवागमन है। सुशील यादव, राकेश कुमार ने बताया कि बड़े-बड़े गड्ढों से धूल उड़ती है।
इससे आसपास के लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। गड्ढों में ईंट के टुकड़े डाले गए है, जो जानलेवा साबित हो रहे हैं। लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मुराईबाग व फतेहपुर राजमार्ग से लोग अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर आते-जाते हैं। बदहाल मार्ग के चलते लोगों को शव लेकर पैदल ही जाना पड़ता है। करीब तीन साल पहले मामा चौराहे पर बनाया गया ओवरब्रिज ध्वस्त हो गया है।
यही नहीं ओवरब्रिज से रायबरेली-प्रयागराज हाईवे को जोड़ने के लिए बनी सड़क गड्ढों में तब्दील हो गई है। इसमें आए दिन भारी वाहन फंस जाते हैं। इस पुल से एक साथ भारी वाहन भी नहीं निकल पाते हैं। जिस मकसद के लिए इस ओवरब्रिज को बनाया गया है, वह अधूरा रहा रहा गया। एनएचएआई के बाद वैसे तो पांच हाईवे हैं, लेकिन ज्यादातर बदहाल है। रायबरेली से लालगंज होते बांदा जाने वाला हाईवे लालगंज के पास बदहाल है।
निर्माणाधीन पुल ध्वस्त हो गए है। इससे आने-जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे खराब हालत रायबरेली-प्रयागराज हाईवे की है। शहर के मामा चौराहे से मुंशीगंज तक तीन किलोमीटर का समय तय करने में तीन घंटे का समय लग जाता है। बदहाल हाईवे के चलते आए दिन जाम लग जाता है। लोग घंटों जाम में रेंगते हुए निकलते हैं। गड्ढे भरने के नाम पर बड़े-बड़े ईंट के टुकड़े डाल दिए गए हैं। आए दिन लोग गिरकर चुटहिल हो जाते हैं।
लोक निर्माण विभाग में 69 नई सड़कों का निर्माण अधर में है। यह सड़कें उन गांवों के लिए बनाई जा रही हैं, जहां 250 से अधिक की आबादी है। इस सड़कों का निर्माण करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से होना है। निर्माण के लिए अब तक 11 करोड़ रुपये का ही बजट मिला है। बजट नहीं मिलने की वजह से निर्माण कार्य अधर में है। इन सड़कों का निर्माण पूरा नहीं होने से 20 हजार ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में कुल मार्ग और उनकी लंबाई
मार्ग संख्या लंबाई किलोमीटर में
राज्यमार्ग छह 170
अन्य जिला मार्ग 52 618
ग्रामीण मार्ग 1830 3268
हाईवे लंबाई किलोमीटर
रायबरेली-प्रयागराज 105
रायबरेली-जौनपुर 166
टांडा-रायबरेली 155
रायबरेली-बांदा 133
रायबरेली-अयोध्या 60
जिले में जितनी भी सड़कें खस्ताहाल हैं, सभी को चिह्नित कराकर उनकी मरम्मत कराई जाएगी। सड़कों की मरम्मत कराने के लिए बजट मांगा गया है। उम्मीद है कि जल्द बजट मिल जाएगा। सड़कों की बदहाली की वजह से लोगों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।- वैभव श्रीवास्तव, डीएम

रायबरेली में गुरुवार को फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज से कचहरी और विकास भवन को जाने वाली सड़क।- फोटो : RAIBARAILY

रायबरेली में गुरुवार को नेहरू नगर क्रॉसिंग से मनिका की ओर जाने वाली बदहाल सड़क।- फोटो : RAIBARAILY

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