500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने से धान खरीद पर ब्रेक सा लग गया है। हालात ये हो गए हैं कि केंद्रों तक पहुंचाने के लिए किसानों के जेब में रुपये नहीं है। ऐसे में कुछ किसान बिचौलिये के हाथ महज 800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान बेचने को मजबूर हैं।
धान खरीद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में खुले 41 क्रय केंद्रों में से अब तक तीन केंद्रों पर ही महज 600 रुपये क्विंटल धान खरीद हुई है। बाकी केंद्रों पर धान खरीद की शुरुआत तक नहीं हो सकी है।
जिले में तीन लाख किसान है। शासन के आदेश पर इस बार 41 केंद्रों पर 40 हजार क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। विभागीय अधिकारियों ने 1 नवंबर से धान खरीद करने का दावा तो किया, लेकिन अब तक इसमें तेजी नहीं आ पाई है।
पुराने नोट बंद के बाद से तो धान खरीद ठप सी हो गई है। सरकारी केंद्रों पर मोटे धान का मूल्य 1470 रुपये और महीन धान का रेट 1510 रुपये प्रति क्विंटल की दर रखा गया है। दिक्कत ये आ रही है कि किसानों के पास धान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए रुपये नहीं है। इसका फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं।
महंगे दाम में बिकने वाले धान को किसान बिचौलियों के हाथ 800 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेच रहे हैं। धान खरीद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 41 में से तीन केंद्रों पर 600 क्विंटल धान खरीदा गया है। बाकी केंद्रों पर पूरी तरह से धान खरीद ठप है।
सदर मंडी समिति परिसर व महराजगंज के विपणन केंद्र व सदर मंडी के एसएफसी खरीद केंद्र ही 600 क्विंटल धान खरीदा गया है। इसके अलावा पीसीएफ, एग्रो, राज्य भंडार निगम, कर्मचारी कल्याण निगम आदि सरकारी एजेंसिंयों के खरीद केंदों की उपलब्धि शून्य है।
सदर मंडी समिति के विपणन केंद्र पर बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे एक किसान का धान पावर फैन से साफ किया जा रहा था। खास बात ये है कि केंद्रों पर अव्यवस्था भी व्याप्त है। डीह, सलोन, खीरों, सिंहपुर समेत अन्य क्षेत्रों में खुले केंद्रों पर केंद्र प्रभारी नदारद मिल रहे हैं।
कांटा और बोरे तक की व्यवस्था अधूरी है। जिला विपणन अधिकारी सौरभ कुमार ने बुधवार को महराजगंज क्षेत्र के कई खरीद केंद्रोें का औचक निरीक्षण किया। पाली केंद्र पर खरीद शून्य मिली। इसके अलावा सिकंदरपुर केंद्र प्रभारी गायब मिले उनको चेतावनी दी गयी। धान खरीद केंद्र कन्नावां में भी खरीद निल रही। सभी से खरीद तेज करने की बात कही।
सिंहपुर ब्लॉक क्षेत्र के किसान माताफेर अवस्थी, जितेंद्र सिंह, हरिनाथ और शेर बहादुर का कहना है कि नोट बंदी की वजह से धान नहीं बिक पा रहा है। केंद्रों तक धान पहुंचाने के लिए किसानों के पास रुपया नहीं है। कुछ किसान तो बिचौलिये के हाथ कम दाम में धान बेच रहे हैं।
किसानों का यह दर्द किसी को नहीं दिख रहा है। इस ओर केंद्र सरकार को ध्यान देना चाहिए। यही हाल रहा तो इस बार गेहूं की फसल की बोआई का कार्य भी पिछड़ जाएगा। जिला विपणन अधिकारी सौरभ यादव का कहना है कि किसान अपना धान सरकारी खरीद केंद्र पर ही बेचें।
सरकारी केंद्रों पर मोटे धान का 1470 व महीन धान 1510 रुपए प्रति क्विंटल दिया जाएगा। धान बिक्री के दूसरे दिन किसानों के खाते में आरटीजीईएस से रुपये भेज दिए जाएंगे। सभी 41 खरीद एजेंसियों के पास शासन ने खरीद के लिए पर्याप्त धन भेजा है। अगले माह से खरीद में तेजी आने की उम्मीद है। अभी तक 600 क्विंटल धान खरीदा गया है।