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कुत्तों का आतंक : एक दिन में 62 लोगों को किया जख्मी

Tue, 18 Mar 2025 12:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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रायबरेली। जिले में आवारा कुत्तों के आतंक ने एंटी रेवीज वैक्सीन (एआरवी) की डिमांड को दो गुना से अधिक बढ़ा दिया है। सोमवार को कुत्तों के हमले में 62 लोग जख्मी हो गए। सभी एआरवी लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे। इस कारण इंजेक्शन कक्ष में दोपहर ढाई बजे तक भीड़ रही। नए मरीजों सहित 201 लोगों में एआरवी का इंजेक्शन लगाया गया।
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जिले में कुत्तों का हमला तेजी से बढ़ा है। सोमवार को चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा के पास 62 नए मरीज एआरवी लगवाने के लिए पहुंचे। इसमें कोमल (16), ज्ञानवती (60), शिवानी (8), कृष्णा (8), आन्या (7), श्रेयांश (2), भीम सिंह (57), सुरेश (34), रानी (4), नैना (7), माधुरी (80), रिया (20) व 50 अन्य लोग कुत्तों के काटने से जख्मी होकर पहुंचे। चिकित्सीय सलाह लेने के बाद इन्होंने वैक्सीन लगवाई। भीड़ अधिक होने के कारण लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा।

72 घंटे के भीतर एआरवी का पहला टीका जरूर लगवाएं
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को रेबीज संक्रमित किसी जानवर ने काट लिया और उसने 72 घंटे के भीतर अपना इलाज नहीं करवाया तो उसके बाद वैक्सीन लगवाने का कोई फायदा नहीं है। इससे बचने के लिए कुत्ते के काटने के 72 घंटे के अंदर एआरवी का पहला टीका जरूर लगवाया जाए। कुत्ता काटने वाले स्थान को कम से कम 10 से 15 मिनट तक साबुन या डिटॉल से साफ करें।
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रेबीज संक्रमण के लक्षण
जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डीएस अस्थाना ने बताया कि यदि पागल कुत्ते ने काटा है और समय से एआरवी नहीं लगी है तो मरीज में संक्रमण बढ़ सकता है। रेबीज का संक्रमण होने के बाद मरीज को पानी से डर लगना, बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, चिंता, भ्रम की स्थिति, खाना-पानी निगलने में कठिनाई, लार निकलना, अनिद्रा, लकवा मार जाना आदि लक्षण सामने आ जाते हैं। रेबीज वायरस के संक्रमण के बाद व्यक्ति का नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। इससे या तो व्यक्ति कोमा में चला जाता है या उसकी मौत हो जाती है।

मौसम में बदलाव से आक्रामक हैं कुत्ते
मौसम में बदलाव के कारण कुत्ते आक्रामक हैं। लोग इनकी चपेट में आने से बचें। कुत्ते के भौंकने पर भागें नहीं। यदि भागेंगे तो वह काट सकते हैं। सभी सीएचसी में पर्याप्त एआरवी उपलब्ध कराई गई है।
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डॉ. प्रदीप अग्रवाल, सीएमएस जिला अस्पताल
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