रायबरेली। जिले में बिजली उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए रनिंग टेंडर नहीं किए गए हैं। इससे लाइन फाॅल्ट या खंभा टूटने की दिक्कत होने पर इसे समय से दुरुस्त नहीं कराया जा सक रहा है। इससे खास तौर पर ग्रामीण इलाके के उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों तक बिजली सप्लाई ठप रहने से गर्मी में परेशानी उठाना पड़ रही है।
बीते दिनों आंधी और बारिश के कारण जगह-जगह सप्लाई लाइन पर पेड़ टूटकर गिरने व खंभे उखड़ने के कारण जिले भर में बिजली व्यवस्था चरमरा गई थी। फॉल्ट को दुरुस्त कराने की कमान अवर अभियंताओं ने संभाली और बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित कराई। जिले में सात वितरण खंडों के अंतर्गत 54 विद्युत उपकेंद्र हैं। कहीं पोल टूटने या कोई अन्य समस्या आने पर वितरण खंड स्तर पर रनिंग टेंडर होना चाहिए।
इसका उद्देश्य है कि ठेकेदार अपने स्तर से बिजली का पोल स्टोर से ले जाकर मौके पर लगाए, लेकिन टेंडर नहीं होने से यह काम अवर अभियंताओं को कराना पड़ता है। विभाग से जुड़े अवर अभियंताओं ने बताया कि हर वितरण खंड में रनिंग टेंडर होना चाहिए। इसके लिए शासन से बजट मिलता है। बजट में हेरफेर करने के लिए गुपचुप तरीके से टेंडर करके भुगतान हो जाता है। इसकी भनक तक अवर अभियंताओं को नहीं लग पाती।
सभी जगह किए जाते हैं टेंडर
सभी वितरण खंडों में रनिंग टेंडर निकाले जाते हैं। कभी-कभी टेंडर निकालने में विलंब हो जाता है। अवर अभियंता जो भी खर्च अपने स्तर से करते हैं, उसका भुगतान भी कर दिया जाता है।
- मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण द्वितीय