रायबरेली। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत टीमों को स्कूलों तक पहुंचाने के लिए हुए 544 वाहनों के टेंडर को निरस्त कर दिया गया है। इन टीमों को इन वाहनों से स्कूलों में पहुंचकर बच्चों की सेहत जांचनी है, लेकिन प्रतापगढ़ की फर्म समय पर वाहन उपलब्ध कराने में नाकाम रही। इतना ही नहीं कई बार तो फर्म ने फर्जी बिल लगाकर भुगतान लेने का प्रयास भी किया। टेंडर निरस्त होने के बाद अब वाहनों की उपलब्धता के लिए नए सिर से टेंडर प्रक्रिया होगी।
स्वास्थ्य विभाग में पिछले फरवरी माह में वाहनों की टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर काम प्रियायंस ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड प्रतापगढ़ को दिया गया था। सीएमओ ने बीती 13 फरवरी को अनुबंध के तहत वाहन उपलब्ध कराने के आदेश दिए थे। एजेंसी को वर्ष 2021 के बाद के मॉडल के वाहन ही उपलब्ध कराने थे। एजेंसी ने अनुबंध के विपरीत और अनफिट वाहन उपलब्ध करा दिए। वाहनों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश का पालन नहीं किया गया। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
इसका संज्ञान लेते हुए ही सीएमओ ने अनुबंध के विपरीत वाहन उपलब्ध कराए जाने के दोषी मिलने के बाद फर्म की सेवाओं को रोक दिया था। सीएमओ डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि डीएम के अनुमोदन बाद अब प्रियायंस ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड प्रतापगढ़ का टेंडर निरस्त कर दिया गया है। फर्म मानकों के अनुरूप वाहन उपलब्ध नहीं करा सकी। जल्द ही नई टेंडर प्रक्रिया कराई जाएगी। (संवाद)