रायबरेली के जीआईसी ग्राउंड में सभा को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि इस बार जनता समझ चुकी है कि सच्चाई क्या है, जिस रथ से चलकर हम आए हैं, वह रथ हमारी संस्कृति में कुरुक्षेत्र का प्रतीक है। रथ महाभारत का भी प्रतीक है। इस तरह के रथ पर कभी भगवान ने भी गीता का संदेश दिया था। आज उसी रथ के माध्यम से हमें सीख मिल रही है। जो पीड़ित हैं वह पीडीए हैं। जो दुखी हैं वो पीडीए हैं, जिसका अपमान हो रहा है, वह पीडीए है।
उन्होंने कहा कि इस बार लाइन एकदम खिंच गई है। एक तरफ पीड़ित लोग हैं दूसरी तरफ प्रताड़ना देना वाले लोग हैं। प्रताड़ना देने वाले लोग बचने वाले नहीं है। 24 में हराया है और 27 में इनका सफाया कर देंगे। यह लोग समझ रहे हैं कि पीड़ा खत्म हो गई है। इनकी हम लोगों से हजारों साल पुारनी लड़ाई है। इन्होंने खाई पैदा की है। इनको न केवल हराएंगे बल्कि समाज में भेदभाव को खत्म करेंगे। यह वे लोग है जो मंदिर को गंगा जल से धुलवाते हैं जब पीडीए समाज से कोई मंदिर जाता है। ये वे लोग हैं जब कुर्सी पर बैठ जाते हैं तो अपमान करने का काम करते हैं। इस बार पीडीए के लोगों ने अपनी ताकत और गिनती का अहसास करा दिया है। हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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जब वोट पड़ेगा तो चाहे कितनी भी ताकत लगा लें, ये पीडीए के लोग मिलकर हराने का काम करेंगे। पीडीए के लोग न केवल निर्बल व कमजोर के साथ खड़े हैं बल्कि संविधान बचाने के लिए खड़े हैं। पीडीए के लोग आरक्षण को बचाने और लोकतंत्र को बचाने के लिए खड़े हैं। देश की संस्कृति और हिन्दु्स्तान को बचाने के लिए खडे़ हैं। ये लोग संविधान और कानून नहीं मानते। कोई एक उदाहरण नहीं है, बल्कि कई उदाहरण हैं।