विकास भवन परिसर में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी का पुतला फूंकते शिक्षक।
रायबरेली। टेट अनिवार्यता को लेकर देश भर के शिक्षक काफी समय से आंदोलन कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि संसद के बजट सत्र में केंद्र सरकार कुछ राहत देने का एलान करेगी। किंतु हाल ही में लोकसभा में शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी द्वारा दिए गए उत्तर में किसी राहत की बात नहीं कही गई। इससे शिक्षक निराश हुए हैं। बुधवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने विकास भवन परिसर में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी का पुतला फूंका।
जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला ने कहा कि देशभर में भर्ती एवं कार्यरत लगभग 20 लाख शिक्षकों की सेवाओं पर संकट मंडरा रहा है। भारत सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया जा रहा है। यह शिक्षकों के साथ अन्याय है। उनके परिवार असुरक्षा में जी रहे हैं। जिला मंत्री मुकेश द्विवेदी ने कहा कि संसद में केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने टीईटी मुद्दे पर जो बयान दिया है, उससे शिक्षकों की भावनाएं आहत हुई हैं। सरकार को शिक्षकों की समस्याएं दूर करनी चाहिए, न कि उनकी आवाज को अनसुना करना चाहिए।
जिला संघर्ष समिति के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने कहा कि देशभर में शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे हैं। पुलिस के माध्यम से दमन करना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। यह रवैया शिक्षक समाज को स्वीकार नहीं है। वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश यादव ने कई जिलों में संगठन के पदाधिकारियों को पुलिस के जरिए रोके जाने की घटना की निंदा की। संयुक्त मंत्री डाॅ. चंद्रमणि बाजपेयी ने कहा कि विद्यालय में नजरबंद करना न केवल मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि पूरे शिक्षक समाज का अपमान है।
जयंत ने दिया था यह बयान
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने टीईटी मामले पर लोकसभा में कहा था कि सरकार की शिक्षक भर्ती और पदोन्नति में टीईटी से सामूहिक छूट देने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा, सेवा में बने रहने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है, जिससे शिक्षक नाराज हैं।