रायबरेली। जाली दस्तावेज से बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) से करीब 9.2 करोड़ रुपये का लोन ले लिया गया। मामले में 48 आवेदकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस जांच कर रही है। जांच की आंच बीओबी के अफसरों तक पहुंच सकती है। इससे उनमें खलबली मची हुई है। पुलिस की जांच जिस तरह से चल रही है, उससे यह बात भी उभर कर सामने आ रही है कि लोन दिलाने में कोई रैकेट सक्रिय है, जिसकी तह तक पहुंचने के लिए खुफिया विभाग को सक्रिय किया गया है।
दरअसल, रायबरेली में वर्ष 2025 में कई बैंक खातों से रुपये निकलने व दूसरे खातों में भेजने के गंभीर मामले सामने आए हैं, जिनकी जांच अभी चल रही है। डीह में पिछले साल अप्रैल में साइबर अपराध से खातेदारों का रुपया डकारने वाले चार शातिरों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले की कड़ी दुबई में बैठे महताब व पाकिस्तान के रहीम से जुड़ी है। जो बदमाश पकड़े गए थे, वह रैकेट के जरिये बैंक खाता खुलवाते थे और फिर बाहर से आने वाला पैसा महताब व रहीम तक पहुंचाते थे।
इसके बदले में उनको कमीशन मिलता था। इसी तरह लोन दिलाकर रुपये डकारने का रैकेट चलने की भी पूरी आशंका है। लोन दिलाने के पीछे कौन मास्टरमाइंड है, इसकी पुलिस जांच कर रही है। असल में नियम सख्त होने के बाद भी बैंक से लोन ले लिया गया, इसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि बैंक के उच्चस्तर के अधिकारी भी इसकी विभागीय पड़ताल कराने के लिए भी तैयारी कर रहे हैं।
अधिकारियों से हो सकती पूछताछ
बैंक से 9.2 करोड़ का लोन लेने का मामला करीब आठ माह पहले ही अफसरों को पता चल गया था, लेकिन रायबरेली से लेकर लखनऊ तक बैठे बैंक अफसर मामले को दबाने में जुटे थे। यही वजह है कि मामले में शामिल बैंक मैनेजर और फील्ड ऑफिसर समेत अन्य बैंककर्मियों का गुपचुप तबादला कर दिया गया। पुलिस अब अफसरों से भी पूछताछ की रणनीति तैयार कर रही है। रायबरेली से लेकर लखनऊ तक के बैंक अधिकारियों से पूछताछ हो सकती है। मामले की विवेचना जितेंद्र कुमार सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बीओबी के मुख्य प्रबंधक से मामले से जुड़े जरूरी दस्तावेज तलब किए हैं। एसपी डॉ. यशवीर सिंह के निर्देश पर पुलिस मामले पर पड़े पर्दे को उठाने में लगी है। सीओ सिटी अरुण कुमार नौहवार का कहना है कि पुलिस मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है। हर बिंदु को खंगाला जा रहा है। साथ ही खुफियातंत्र को भी सक्रिय किया गया है।