वहीं विविध देय वसूली में किसी तरह किसानों का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। हालांकि कितना रुपया वसूली करने के लिए बकाया है, यह जानने के लिए अधिकारी ब्योरा जुटा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जिला सूखाग्रस्त घोषित होने के बाद शासन से आए आदेश के तहत किसानों को लाभ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
एडीएम वित्त एवं राजस्व शीतला प्रसाद का कहना है कि जिला सूखाग्रस्त घोषित कर दिया है। देर शाम सूखाग्रस्त होने के बाद वसूली स्थगित किए जाने का आदेश भी आ गया है।
इस पर भू-राजस्व और सिंचाई वसूली 31 मार्च 2016 तक स्थगित कर दी गई है। इससे करीब एक लाख किसानों को वसूली जमा करने से राहत मिलेगी।
किसानों को कितना रुपया बकाया है, इसका ब्योरा जुटाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि विविध देय वसूली को लेकर किसानों का किसी कीमत पर उत्पीड़न नहीं किया जाएगा।
इसमें बैंक समेत अन्य देय शामिल हैं। यदि इसकी शिकायत मिलेगी तो अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
वहीं किसानों का कहना है कि बेमौसम हुई बारिश से हुए नुकसान में ज्यादातर किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है।
बारिश-ओलावृष्टि से गेहूं समेत अन्य फसलों को नुकसान हुआ था। किसानों को मुआवजे के लिए एक अरब 96 करोड़ रुपये से अधिक की मांग शासन से की गई थी।
इसके सापेक्ष अब तक सिर्फ 49 करोड़ 45 लाख रुपये का मुआवजा ही किसानों में बांटा जा सका। बाकी किसानों को मुआवजा बांटने के लिए शासन की ओर से बजट नहीं दिया गया है।
ऐसे में अधिकतर किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। जिले में तीन लाख 85 हजार किसान है। पिछला मुआवजा न मिलने और अब सूखे से किसान परेशान हैं।
परशदेपुर क्षेत्र के अनीश, राजू, डलमऊ क्षेत्र के अंकित और सतांव क्षेत्र के किसान अमित का कहना है कि जिला सूखाग्रस्त तो कर दिया जाता है, लेकिन इसका लाभ किसानों को मिले तो जाना जाए।
पिछले साल गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। गेहूं की बोआई करने का समय फिर आ गया।