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अपनी विरासत की अच्छाइयों को स्वीकार करने में अभी भी विदेशी प्रमाणपत्र की जरूरत-स्मृति ईरानी

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रायबरेली में गुरुवार को अमेठी जिले के बहादुरपुर स्थित आरजीआईपीटी के विवेकानंद सभागार में व्याख? - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। अमेठी सांसद एवं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गुरुवार को राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी संस्थान जायस में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का लोकार्पण और व्याख्यानमाला का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद को शिकागो से अमेठी में आने 126 वर्ष लग गये।
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प्रतिमा के रूप में एक संस्कार को संस्थान में स्थापित किया गया है। ये इस संस्थान के इस विचार को व्यक्त करते हैं कि यहां सिर्फ पढ़ाई नहीं, संस्कार भी दिए जाएंगे। स्वामी जी ने यह मिथक तोड़ा कि कोई भारतीय ऋषि या स्वामी अंग्रेजी नहीं बोल सकता। लेकिन दुर्भाग्य है कि अब भी हमें अपनी ही विरासत की अच्छाइयों को स्वीकार करने के लिए विदेशी प्रमाणपत्र की जरूरत होती है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देते हुए कहा कि वो स्त्री शक्ति को विशेष महत्व देते थे और उनका मानना था कि अगर स्त्री शिक्षित कर दिया जाए तो वह अपना, परिवार एवं समाज सबका विकास खुद करने में सक्षम है। उन्होंने संस्थान के छात्रों से अनुरोध किया कि वे सरकारी स्कूलों के बच्चों को स्वैच्छिक रूप से गणित एवं विज्ञान का अध्यापन कराएं।
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इस मौके पर विशिष्ट अतिथि रामकृष्ण मिशन वाराणसी के स्वामी वरिष्ठानंद ने कहा कि विवेकानंद ने आज के दिन 126 साल पहले शिकागो विश्व धर्म सभा में भारत की विरासत से लोगों को परिचित कराया। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर अखौरी सुधीर कुमार सिन्हा ने कहा कि व्याख्यान माला का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को आमंत्रित कर छात्र-छात्राओं व प्राध्यापकों के बीच ज्ञान के आदान प्रदान का प्लेटफॉर्म उपलब्ध करना है। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह भी मौजूद रहे।
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