शिवगढ़ । शिवली गांव स्थित बरखंडेश्वर महादेव मंदिर परिसर में चल रही श्रीराम कथा में प्रवाचक श्रीकृष्णदास शास्त्री ने लक्ष्मण शक्ति और भरत व भगवान हनुमानजी के प्रसंग की चर्चा की। बताया कि श्रीराम ने लक्ष्मण शक्ति लगने के बाद विलाप करते हुए कहा कि यदि मुझे पता होता कि वन में भाई का विछोह होना है, तो पिता के वचन को न मानता। इस प्रसंग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने भाई के वियोग में प्रेम की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करते नजर आए।
प्रवाचक ने कहा कि वर्तमान में भाई से बड़ा कोई बैरी नहीं है। एक-एक इंच के लिए भाई-भाई का दुश्मन बन बैठा है। श्रीराम वन गए तो भाई भरत ने भी भगवान श्रीराम की खड़ाऊ सिंहासन पर रखकर साम्राज्य का संचालन करते हुए वनवासी का जीवन व्यतीत किया। दूसरे प्रसंग पर चर्चा करते हुए कहा कि विकराल स्वरूप हनुमान जी को देखकर अयोध्यावासी डर गए। भरत जी ने कुश का संधान कर पहाड़ सहित हनुमान जी को नीचे उतारा। हनुमान के मुख से श्रीराम का नाम सुन भरत को दुख हुआ।
भरत ने कहा कि मुझसे अपराध हो गया भैया श्रीराम का ही कोई सेवक मुझसे घायल हो गया। तब हनुमान जी ने कहा कि आप परेशान न हों मेरे स्वामी भगवान श्रीराम के नाम में इतना सार है कि सिर्फ उसी नाम से ही मैं क्षण मात्र में यह पहाड़ वहां पहुंचा दूंगा। कथा सुन श्रोता भाव विभोर हो गए। इस अवसर पर प्रदीप त्रिवेदी, जितेंद्र सिंह, कृष्ण कुमार, सिंह गीता, सिंह विपिन, उमा सिंह, धीरज सिंह व आशीष मौजूद रहे। संवाद
विकास बाजपेयी