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डीएम की संस्तुति के बाद कॉलेज को काली सूची में डालने में गुजर गए सात माह

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कॉलेज को काली सूची में डालने में गुजर गए सात माह
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- ‘अमर उजाला’ ने उजागर किया था महाराणा प्रताप बालिका महाविद्यालय में छात्रवृत्ति घोटाला
- जांच में घोटाले की पुष्टि के बाद तत्कालीन डीएम ने 3 अगस्त 2019 को की थी संस्तुति
रायबरेली। महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ में वर्ष 2015-16 में मान्यता न होने के बाद भी 103 छात्राओं का दाखिला लेकर छात्रवृत्ति घोटाला किया गया था। ‘अमर उजाला’ ने घोटाले की पोल खोली थी, जिसके बाद तत्कालीन डीएम नेहा शर्मा ने जांच कराई थी। जांच में घोटाले की पुष्टि के बाद छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए कॉलेज को काली सूची में शामिल करने के लिए 03 अगस्त 2019 को संस्तुति करके रिपोर्ट समाज कल्याण निदेशालय को भेज दी थी। संस्तुति के सात माह बाद कॉलेज को काली सूची में डाला गया है।
‘अमर उजाला’ ने 26 मई 2019 को 60 लाख के छात्रवृत्ति घोटाले की शिकायत, 11 जून 2019 को ‘एडमिशन कहीं और छात्रवृत्ति दूसरे स्कूल ने बांट दी’ तथा 23 जून 2019 को ‘घोटाले की पुष्टि, बिना मान्यता के छात्राओं का लिया दाखिला’, 11 जुलाई 2019 को ‘छात्रवृत्ति घोटाले में कॉलेज की मान्यता होगी निरस्त’ शीर्षक से खबरें प्रकाशित की थी। इसके अलावा छात्रवृत्ति घोटाले से संबंधित कई और खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी।
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अमर उजाला की खबरों को संज्ञान में लेकर तत्कीलन डीएम नेहा शर्मा ने जिला विकास अधिकारी एके वैश्य व जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. चंद्रशेखर मालवीय की टीम को जांच करके जवाब देने के आदेश दिए थे। जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद डीएम ने कॉलेज को काली सूची में डालने की संस्तुति कर दी थी। अब शासन ने महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया है।
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इन छात्राओं को दिलाई गई थी छात्रवृत्ति
जाति छात्राओं की संख्या धनराशि
सामान्य वर्ग 16 100700
अनुसूचित जाति 15 72700
पिछड़ी जाति 64 374880
अल्पसंख्यक 08 52800
महाराणा प्रताप महिला महाविद्यालय डलमऊ में छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में पूर्व में ही जांच के बाद डीएम ने कॉलेज को काली सूची में शामिल करने की संस्तुति की थी। शासन स्तर से कार्रवाई हो गई। अब कॉलेज को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना से दूर रखा जाएगा।-रामचंद्र दुबे, जिला समाज कल्याण अधिकारी
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