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गंगा एक्सप्रेस वे को मिलेगी रफ्तार, बिजली लाइनों के हटाने के लिए मिले सात करोड़

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रायबरेली। गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण में तेजी दिख रही है। अन्य विभागों के साथ ही पावर कॉर्पोरेशन भी इसमें सहयोग कर रहा है।
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पांच बड़ी लाइनों के टावर हटाने की कवायद शुरू हो गई है। ट्रांसमिशन के अभियंताओं ने टावर हटवाने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को 17 करोड़ 76 लाख रुपये का इस्टीमेट सौंपा था। इसमें से सात करोड़ मिल गए हैं जिससे पावर कॉर्पोरेशन ने काम शुरू करवा दिया है।
करीब 596 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे को मेरठ से होकर प्रयागराज तक पहुंचना है। एक्सप्रेस-वे जिले की चार तहसीलों लालगंज, डलमऊ, सलोन और ऊंचाहार से गुजरेगा।
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जहां से गंगा एक्सप्रेस-वे निकल रहा है, वहीं पर पहले से हाईटेंशन लाइनों के टॉवर लगे हैं। जिले के सबसे बड़े 400 केवी का निर्माणाधीन ट्रांसमिशन सिरसिरा की लाइन भी इसकी जद में आ रही है, जिसके टॉवर को हटवाया जाएगा।
इसके अलावा अमावां पावर ग्रिड की 220 केवी की लाइन का टॉवर हटाया जाएगा। लालगंज माडर्न रेल कोच और स्पात निगम की 132 केवी लाइन का टॉवर भी गंगा एक्सप्रेस-वे में रोडा बन रहा है।
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इस लाइन का टावर भी हटाया जाएगा। यही नहीं बछरावां-सरेनी और त्रिपुला से डलमऊ के बीच बनी 132 केवी लाइन के टावर को हटाया जाएगा।
गंगा एक्सप्रेस-वे की जद में पांच बड़ी लाइनों के टॉवर आ रहे हैं। उन्हें हटाने के लिए यूपीडा को 17 करोड़ 76 लाख रुपये का इस्टीमेट भेजा गया था। इसमें सात करोड़ रुपये मिल गए हैं। टॉवर हटाने का काम जल्द शुरू कराया जाएगा।
- अखिलेश कुमार, अधिशासी अभियंता, ट्रांसमिशन
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