रायबरेली। शहर कोतवाली में सामान्य जाति के व्यक्ति की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में विवेचना के दौरान बढ़ाई गई अनुसूचित जाति जनजाति (एससी-एसटी) के उत्पीड़न की धारा को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। तत्काल सीओ सिटी ने मारपीट के मुकदमे को एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में तरमीम करके रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर दी थी। हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न की धारा को खारिज करते हुए संबंधित न्यायालय को मुकदमे में सुनवाई करने का आदेश दिया है।
शहर कोतवाली क्षेत्र के डिग्री कॉलेज चौराहा के पास 14 दिसंबर 2024 को मारपीट की घटना हुई थी। मामले में अमित चौबे ने दो लोगों को नामजद करते हुए चार लोगों पर मारपीट की एफआईआर कराई थी। पीड़ित ने आरोप लगाया था कि उनके भाई अभिषेक चौबे के साथ मारपीट की गई है। केस दर्ज होने के बाद उप निरीक्षक विकास सिंह ने एफआईआर की विवेचना शुरू की। विवेचना के दौरान उप निरीक्षक ने किला बाजार निवासी शकील अहमद को भी आरोपित कर दिया। साथ ही लकी और माताबदल के बयान के आधार पर केस को एससी-एसटी उत्पीड़न की धारा में तरमीम कर दिया।
मामला अनुसूचित जाति जनजाति के उत्पीड़न का प्रकाश में आने के बाद विवेचना तत्कालीन सीओ सिटी ने विवेचना पूरी कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। विवेचना के दौरान आरोपित बनाए गए शकील ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले में हाईकोर्ट लखनऊ के न्यायाधीश राम मनोहर मिश्रा ने तत्कालीन सीओ सिटी को भी तलब किया था। साथ ही एससी-एसटी उत्पीड़न की धारा बढ़ाने के कारणों के बारे में पूछा था। न्यायालय ने मुकदमे में एससी-एसटी की धारा को खारिज करते हुए संबंधित कोर्ट को मुकदमे में सुनवाई करने के आदेश दिए हैं।